बिग बाॅस फेम अाैर अनुराग कश्यप की फिल्माें में गाना गा चुके दीपक ठाकुर काे पैसे के अभाव में बीच में ही एमबीए की पढ़ाई छाेड़नी पड़ी थी। संगीत के क्षेत्र में करियर बनाने का शाैक रखने वाले दीपक काे मुंबई में अाॅडिशन तक में जाने के लिए पैसा नहीं था। उन्हाेंने मुजफ्फरपुर में रहकर संगीत सीखी अाैर अाॅडिशन भी मुजफ्फरपुर में ही दिया। अाॅडिशन के दाे साल बाद तक दाल-राेटी के लिए संघर्ष के लिए पढ़ाई जारी रही। जब मजबूरी में एमबीए की पढ़ाई छाेड़ गांव वापस अाए ताे अनुराग कश्यप ने फाेन कर गाने का अाॅफर दिया। अब वह खुद तीन एलबम रिलीज करेंगे। दीपक ठाकुर रविवार काे भागलपुर में थे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बक्सर जिले के अथर गांव के दीपक ने मुजफ्फरपुर में ली संगीत की शिक्षा, गैंग्स ऑफ वासेपुर और मुक्केबाज फिल्म के लिए गाए हैं गीत
कभी निराश न हाें, सफलता अपने संघर्ष की अवधि खुद चुनती है
दीपक ठाकुर भले ही अाज कराड़ाें लाेगाें के दिल पर राज करते हैं। मगर एक समय एेसा भी था जब घर चलाने के लिए उन्हाेंने गांव की शादियाें मेंं गाना गया। दीपक ने कहा कि संघर्ष के दिनाें में अापकाे लगता कि काेई अपना नहीं है। मगर जब अाप सफल हाेते हैं ताे हर दिन नए लाेग अापके जीवन से जुड़ने लगते हैं। संघर्ष कठिन हाेता है। कई बार हिम्मत भी टूटती है। मगर तय समय के बाद संघर्ष से संतुष्ट हाेकर सफलता अापसे हाथ मिलाती है। बिहारी बुद्धि अाैर मेहनत पूरे देश में प्रसिद्ध है। युवा बस संघर्ष की अवधि तय किए बिना मेहनत करें ताे सफल जरूर हाेंगे। अगर मैं सफल हाे पाया हूं ताे हर इंसान सफल हाे सकता है।


इतने पैसे नहीं थे कि अाॅडिशन के लिए बाहर जा सकें
बक्सर जिले के अथर गांव के दीपक ने बताया कि उनके पिता पंकज ठाकुर किसान हैं। हमने बचपन से ही गरीबी देखी हैं। घर का बड़ा बेटा हाेने के नाते दाे छाेटी बहनाें की जिम्मेदारी थी। मुझे गाने का शाैक था। घर पर बताया ताे पिता ने हां कर दी। मुजफ्फरपुर से बीबीए की पढ़ाई करते हुए वहीं संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की। अाॅडिशन के लिए पैसे थे नहीं कि बाहर जा सकूं। संगीत निर्देशक स्नेहा खान वाल्कर 2009 में मुजफ्फरपुर अाई थीं। संगीत शिक्षक डाॅ. संजय कुमार संजु ने उनसे मिलवाया।
पैसे के अभाव में छाेड़नी पड़ी थी एमबीए की पढ़ाई, घर पर बैठे थे तभी
फिल्म में गाने का मिला माैका, अब खुद का तीन एलबम करेंेगे रिलीज
मैंने उन्हें अपना गाना सुनाया। फिर दाे साल बाद मुझे डायरेक्टर अनुराग कश्यप का फाेन अाया। उन्हाेंने मुझे गैंग्स ऑफ वासेपुर में गाने का अवसर दिया। फिल्म करने बाद घर की जिम्मेदारियां पूरी करने के अागे की पढ़ाई करने का फैसला किया। नाेएडा के एक काॅलेज से एमबीए में दाखिला लिया। उस वक्त कुल बचत मेरे पास 25 हजार रुपए थे।

मैंने उससे फीस भर दी। मगर अाैर एक लाख 47 हजार रुपए की दरकार थी। पार्ट टाइम मेें जाे कमाता था वह रहने अाैर खाने में खर्च हाे जाते थे। फीस का पैसा नहीं हाेने पर जब सब कुछ छाेड़कर गांव अा गया ताे अनुराग कश्यप का फाेन अाया अाैर उन्हाेंने मुक्केबाज फिल्म में गाने का माैका दिया।

पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के लिए बिग बाॅस से किया था क्विट
दीपक ठाकुर ने बताया कि उन्हाेंने बिग बाॅस का अाॅडिशन देने का िनर्णय लिया। करीब 12 फेज के अाॅडिशन के बाद मेरा बिग बाॅस में चयन हुअा। फिनाले में पहुंचने के बाद 25 लाख रुपए लेकर गेम काे क्विट किया था। परिवार काे पैसे की जरूरत थी। इसलिए बिग बाॅस से बाहर हुअा। उन्हाेंने बताया कि उन्हें तीन फिल्मों में गाने का ऑफर मिला है। उन्हें एक सीरियल में भी माैका मिला है। अगले महीने खुद का तीन एलबम भी रिलीज करूंगा।

