नवगछिया : नगर पंचायत प्रशासन की उदासीनता से गहरा सकता है जल संकट.. अस्तित्व पर खतरा

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नवगछिया की खिरनई नदी किनारे कूड़ा डंप करने, नालों व शौचालय की टंकी का पानी जाने से इसका पानी दूषित हो रहा है। इससे नदी के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। वहीं शहर के आसपास के इलाकों का पानी भी दूषित हो रहा है। खिरनई नदी नवगछिया में जल संचय के लिए एक बड़ा संसाधन है। लेकिन इसे बचाने के लिए अफसर और बुद्धिजीवी वर्ग भी अब तक गैरजिम्मेदार बने हुए हैं। अगर यही स्थिति रही तो 10-15 साल में नवगछिया में जलसंकट गहरा जाएगा। नगर पंचायत प्रशासन और स्थानीय लोग नदी में कूड़ा डाल रहे हैं। इसके अलावा नदी तट पर बसे सैकड़ों लोगों के घरों के शौचालय का मलबा भी नदी में ही गिराया जा रहा है। इससे खिरनई का पानी काला पड़ने लगा है।

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शौचालय का अवशेष गिराने पर लगाई जाएगी रोक

नगर पंचायत द्वारा नदी में कूड़ा नहीं गिराया जा रहा है। चिह्नित स्थान जमुनिया के पास कूड़ा डंप किया जाता है। नदी किनारे जो कूड़ा है वह पूर्व में ही डंप किया गया था। लोगों द्वारा अगर नदी में कूड़ा फेंका जा रहा है तो उन के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। लोगों द्वारा शौचालय का मलबा नदी में गिराने पर रोक लगाई जाएगी। – संजीव कुमार सुमन, कार्यपाल

क पदाधिकारी, नगर पंचायत

लोगों ने कहा- ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ जहां सरकार जल संचय के लिए नए पोखर, तालाब की खुदाई लाखों करोड़ों की योजना चलाकर कर रही हैं। ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे। ऐसी स्थिति में नवगछिया के ऐतिहासिक खिरनई नदी किनारे कूड़ा डंपिंग कर नगर पंचायत प्रशासन इसे गंदा कर रहा है। इससे नवगछिया के ऐतिहासिक खिरनई नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को नदी को बचाने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।

50 साल पहले खिरनई नदी का था कोसी से सीधा संपर्क

खिरनई नदी नवगछिया शहर को दो भागों में बांटती है। नदी का कोसी की मुख्यधारा के संपर्क में भंग हो जाने के कारण अब इसकी स्थिति पोखर जैसी हो गई है। फिर भी इसकी खासियत है कि इसमें सालों भर पानी रहता है। बरसात में तो यह लबालब भर जाती है। नवगछिया के लिए पर्यावरण संतुलन एवं जल संसाधन की दृष्टि से बहुमूल्य धरोहर है। अभी इस नदी का अस्तित्व राजेंद्र कॉलोनी से माखातकिया तक करीब 500 मीटर लंबे क्षेत्र में है। 50 वर्ष पहले इस नदी का कोसी के साथ सीधा संपर्क था। लेकिन कोसी नदी पर बांध बनने के बाद इसका मुख्य धारा से संपर्क भंग हो गया है।