मकर संक्राति 15 जनवरी को है। गौशाल के पंडित दयानंद पाण्डेय ने बताया कि मकर राशि में सूर्य का प्रवेश 15 जनवरी को प्रात: 8:24 बजे होगा और दिनभर बना रहेगा। श्रद्धालु दिनभर सहजता से गंगा घाटों से लेकर ताल तलैया में स्नान ध्यान कर पाएंगे। दान पुण्य का भी शुभ मुहूर्त दिनभर बना रहेगा। इस समय सूर्य उत्तरायण में होता है।
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क्या होता है संक्राति
पंडित श्रीराम पाठक कहते हैं कि सूर्य का किसी राशि विशेष में प्रवेश कर भ्रमण करना संक्राति कहलाता है। भगवान भास्कर हर माह नई राशि में प्रवेश करते हैं। इसलिए वर्ष भर में बारह संक्राति होती है। पर मानव के जीवन काल में दो संक्रातियों का विशेष महत्व है। एक मकर संक्रांति और दूसरा कर्क संक्रांति। ऐसी मान्यता है कि सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होता है तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं। मकर संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत होती है। जबकि कर्क संक्रांति से जल तत्व की।

मकर संक्राति से होता है शुभ कार्य
वही पंडित अजीत पाण्डेय ने बताया कि सूर्य और शनि का संबंध इस पर्व से होने के कारण यह काफी महत्वपूर्ण है। इसी त्योहार पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं। शुक्र का उदय होता है। इसलिए मकर संक्राति से शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है। पंडित कहते हैं कि जिस किसी की कुंडली में सूर्य या शनि की स्थिति खराब रहती है तो इस पर्व पर विशेष तरह की पूजा से उसे सुधार सकते हैं।
