नवगछिया : 400 वर्ष पुराना भ्रमरपुर सिद्धपीठ मणिद्वीप दुर्गा मंदिर: आस्था और चमत्कार का केंद्र

नवगछिया । प्रखंड का प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर, भ्रमरपुर सिद्धपीठ मणिद्वीप, भक्तों की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। जिस प्रकार राम जी का धाम साकेत, श्रीकृष्ण का गोकुल और भोले बाबा का कैलाश है, उसी तरह मां दुर्गा का पावन धाम मणिद्वीप कहा जाता है। यह स्थल केवल धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि लोकआस्था और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक भी है।

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ग्रामीण बुजुर्गों का मानना है कि अतीत में कई बार श्रद्धालुओं ने रात्रि में स्वयं भगवती को मंदिर प्रांगण में विचरण करते देखा है। इसी कारण यह स्थान आज भी चमत्कारों और दिव्य अनुभवों के लिए प्रसिद्ध है।

मंदिर की दैनिक गतिविधियाँ अत्यंत भव्य और अनुशासित होती हैं। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और संध्या आरती में हजारों की संख्या में महिला-पुरुष शामिल होकर भक्ति रस में डूब जाते हैं। भक्तों के जयकारे और घंटे-घड़ियाल की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

करीब 400 वर्ष पुराना यह मंदिर तांत्रिक और वैदिक विधि से पूजा-अर्चना के लिए विख्यात है। यहाँ होने वाली पूजा केवल एक धर्म या वर्ग तक सीमित नहीं है। हिंदू ही नहीं, मुस्लिम समुदाय के लोग भी रोजाना मंदिर पहुँचकर धूप-बत्ती दिखाते हैं और मां से आशीर्वाद मांगते हैं। यह परंपरा इस सिद्धपीठ को साम्प्रदायिक एकता और सद्भाव का जीवंत उदाहरण बनाती है।

हर साल नवरात्र और दुर्गापूजा के अवसर पर यहाँ का मेला लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को आकर्षित करता है। यह मंदिर न सिर्फ नवगछिया बल्कि आसपास के छह जिलों तक के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।

अष्टमी के दिन विवाहित महिलाएँ विशेष विधि से माता रानी को खोईछा भरती हैं, जो माँ के आशीर्वाद और परिवार की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूजा-अर्चना विद्वान पंडित शशिकांत झा और आचार्य अभिमन्यु गोस्वामी के मार्गदर्शन में परंपरागत विधि-विधान के अनुसार संपन्न होती है।

मंदिर परिसर में नवरात्र के दौरान दिन-रात भक्ति गीत, भजन और कीर्तन की गूंज बनी रहती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ आकर मां दुर्गा से प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

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