सर्दियों में विटामिन डी को न करें नजरअंदाज, इसके होते हैं कई फायदे

विटामिन डी हमारी हड्डियों के लिए ही नहीं सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी कितना जरूरी है, यह तो हम सभी जानते हैं। सर्दियों में इसे अपने रोजाना के आहार में शामिल करना और भी जरूरी हो जाता है। दरअसल, सर्दियों में विटामिन डी के सबसे अहम प्राकृतिक स्रोत सूरज से हमारा सामना कुछ कम होता है। इसका बड़ा सीधा कारण यह है कि ठंड के कारण तो पहले ही सब घरों में दुबके रहते हैं। साथ ही ठंड से बचने के लिए पहने जाने वाले गर्म कपड़ों के कारण सूरज की रोशनी हमारे शरीर पर कम पड़ती है। शारीरिक क्रिया-कलाप कम होने के कारण खानपान भी बेतरतीब रहता है। लिहाजा विटामिन डी के दोनों प्राकृतिक स्रोत कुछ खास कारगर नहीं रह जाते हैं।

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हालांकि यह भी पूरे तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि इन्हें लेने के बाद शरीर की जरूरतें पूरी हो जाएंगी।

रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है
बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के मुताबिक विटामिन की जरूरत सर्दियों में विटामिन डी की आवश्यकता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इस दौरान हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कुछ कम रहती है। विटामिन डी रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ाने के साथ ही दिल और दिमाग को भी दुरुस्त रखने में कारगर होता है। इसके अलावा कैंसर से रोकथाम में भी मददगार है क्योंकि यह कोशिकीय विकास रोकने में भी अहम भूमिका निभाता है।

क्यों जरूरी है विटामिन डी
अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित शोध के मुताबिक विटामिन एक तरह के हार्मोन का समूह है। अन्य हार्मोन की तरह शरीर में इसका भी बेहद अहम काम है। यह शरीर को विभिन्न स्रोतों से मिलने वाले कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और जिंक जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को सोखने में मददगार होता है। शोध के मुताबिक विटामिन डी के अभाव में हमारा शरीर दूध से मिलने वाला कैल्शियम भी 10 से 15 फीसदी ही सोख पाता है।

रोज लें विटामिन डी
शोधकर्ताओं का कहना है कि एक से 70 साल तक के लोगों के लिए रोजाना 50 माइक्रोग्राम विटामिन डी लेना जरूरी है। हालांकि इस मात्रा पर कई अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता एकमत नहीं हैं। कुछ का कहना है कि बेहतर सेहत के लिए रोजाना की मात्रा में और इजाफा हो ना चाहिए। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इसकी सही मात्रा का आकलन करने के लिए 2010 में एक शोध शुरू किया है, जिसके नतीजे अभी आने बाकी हैं। इसमें विटामिन डी का कैंसर, हृदय रोग, आघात और अन्य गंभीर बीमारियों पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए 25000 अमेरिकी महिलाओं और पुरुषों के आंकड़ों का अध्ययन किया जा रहा है।

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