मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार से आम मरीजों के लिए एमआरआई जांच की सुविधा शुरू हो गई। जिसमें दो मरीजों का टेस्ट किया गया। अब अस्पताल के मरीजों को एमआरआई की जरूरत पड़ने पर प्राइवेट सेंटरों पर जाने की जरूरत नहीं होगी। इससे पूर्व 10 दिनों तक टेक्नीशियनों को ट्रेनिंग दी गयी, ताकि टेस्ट करने के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। उधर, बरसात आते ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डेंगू के मरीजों के इलाज की तैयारी शुरू हो गई है। प्रबंधन ने इमरजेंसी स्थित ट्रॉमा वार्ड के ऊपरी फ्लोर पर डेंगू वार्ड बनाने का निर्देश दिया है। 10 बेड के इस वार्ड में 24 घंटे दो नर्सों की तैनाती रहेगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जांच शुरू होने से एमसीआई के निरीक्षण में होगा फायदा
अधीक्षक डॉ. आरसी मंडल ने बताया कि मरीजों के लिए एमआरआई जांच की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। इससे जहां अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के निरीक्षण में कॉलेज को लाभ मिलेगा, वहीं स्तरीय इलाज में भी मरीजों को सुविधा होगी। इससे पूर्व मेडिसिन, सर्जरी व अन्य विभागों में पीजी की पढ़ाई के लिए एमआरआई नहीं होने के चलते स्थायी मान्यता नहीं मिल पा रही थी। एमसीआई ने हर बार अपने निरीक्षण में इसकी कमी को लेकर सवाल उठाए थे, अब यह कमी दूर हो गई है। इसी महीने एमबीबीएस की सौ सीटों को लेकर स्थायी मान्यता के लिए एमसीआई की टीम आने वाली है। प्रबंधन की ओर से उपकरण तो लगभग तैयार कर लिए गए हैं, अब सिर्फ फैकल्टी की कमी ही दूर करना बाकी है।

इमरजेंसी के डॉक्टर करेंगे डेंगू वार्ड में इलाज
अधीक्षक ने बताया कि डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज इमरजेंसी के डॉक्टर ही करेंगे। जांच के लिए दो हजार डेंगू टेस्ट किट (एनएच1) की मांग की गयी थी। फिलहाल बिहार सर्विस मेडिकल कॉरपोरेशन की ओर से 500 टेस्ट किट उपलब्ध कराया गया है। मरीजों के बेड पर मच्छरदानी देने की भी व्यवस्था की गई है। दरअसल बरसात के बाद जैसे ही ठंड शुरू होती है, डेंगू के मरीज आने लगते हैं। यह स्थित दिसंबर तक रहती है। इसके बाद मौसम में बदलाव आते ही डेंगू के मच्छर समाप्त हो जाते हैं।
कई साल से चल रही थी एमआरआई की तैयारी
दरअसल हर बार एमआरआई का मसला बड़ा मुद्दा यहां के लिए हो जाता था। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे के कार्यकाल से ही एमआरआई लगाने की कवायद शुरू हो गई थी पर यह मामला कागजी कार्रवाई से ऊपर आ ही नहीं पाता था। इसके बाद तत्कालीन मंत्री रामधीन सिंह के कार्यकाल में कोलकाता की एक एजेंसी से करार की बात हुई पर एन मौके पर एजेंसी ने इनकार कर दिया। फिर स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप के कार्यकाल में कवायद तेज हुई और अब मंगल पांडेय के कार्यकाल में पूरा हुआ।
