नवगछिया पहुचे जिलाधिकारी कर्मचारियों में हरकंप, कब्रिस्तान विवाद को लेकर निर्देश, अस्पताल की कुव्यवस्था को देख भड़के-Naugachia News4
नवगछिया : रंगरा स्थित कब्रिस्तान को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को लेकर डीएम प्रणव कुमार ने विवादित स्थल का जायजा लिया. डीएम द्वारा विवादित स्थल की जांच करने के बाद रंगरा थाना परिसर में दोनों पक्षों के ग्रामीणों के बीच बैठक की गई. डीएम के बैठक की सूचना के बावजूद भी एक पक्ष के लोग पूर्ण रूप से शामिल नहीं हुए. जबकि दूसरे पक्ष के लोग अपने कागजात को लेकर पूरी तैयारी के साथ आए थे. एक पक्ष के लोगों के द्वारा बैठक में नहीं शामिल होने से डीएम खपा हो गए.
रंगरा कब्रिस्तान विवाद को लेकर दोनों पक्ष के ग्रामीणों के साथ रंगरा थाने में डीएम ने की बैठक
,, शनिवार तक आपसी विचार-विमर्श कर दोनों पक्षों को मामला सुलझाने का दिया निर्देश
,, समझौते के बावजूद विवादित स्थल पर बलवा करने वाले उपद्रवी तत्वों पर कानूनी कार्रवाई करने का दिया निर्देश
,, लोगों की शिकायत पर रंगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे डीएम ने अस्पताल की कुव्यवस्था को देख भड़के, अस्पताल प्रबंधक एवं अस्पताल प्रभारी का वेतन बंद करने का दिया निर्देश
बैठक में उपस्थित दोनों पक्ष के ग्रामीणों एवं सम्मानित लोगों ने विवाद को समाप्त करने के लिए अपनी अपनी सहमति दी. इस पर डीएम प्रणव कुमार ने बैठक में एक पक्ष के प्रतिनिधित्व कर रहे लोगों को अगले शनिवार तक आपसी विचार-विमर्श के बाद फैसला लेने का निर्देश दिया. साथ ही डीएम ने बैठक में मौजूद नवगछिया एसपी निधि रानी, एसडीओ मुकेश कुमार, रंगरा बीडीओ रघुनंदन आनंद एवं अंचलाधिकारी जितेंद्र कुमार राम को संयुक्त रूप से सुलह के बावजूद भी अनावश्यक रूप से वलबा करने वाले उपद्रवी तत्वों को चिन्हित कर उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

,, लोगों की शिकायत पर रंगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं अस्पताल परिसर स्थित करोड़ों रुपए की लागत से नवनिर्मित अस्पताल भवन का किया जांच
रंगरा थाना परिसर में बैठक के दौरान ही राजद नेता अजहर आलम ने रंगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की कुव्यवस्था एवं अस्पताल परिसर स्थित लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से 35 बेड के नवनिर्मित अस्पताल भवन के घटिया निर्माण की बात उठाई. बैठक समाप्त होते ही डीएम सीधे रंगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे. जहां उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लिया. अस्पताल में घुसते ही अस्पताल में गंदगी के अंबार एवं कुव्यवस्था के अलावे अस्पताल भवन के जीर्ण शिर्ण स्थिति को देखकर भड़क गए. उन्होंने सीधे अस्पताल प्रबंधक एवं पीएचसी प्रभारी को बुलाकर उनकी क्लास लगाई. डीएम ने अस्पताल प्रबंधक अमरेंद्र कुमार एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर रंजन कुमार को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या यही अस्पताल है? यह तो अस्पताल नहीं बल्कि खंडहर है. आप लोगों ने इसकी मरम्मत एवं मेंटेनेंस अबतक क्यों नहीं करवाई.
इस पर मौजूद अस्पताल प्रबंधक एवं चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा किसी प्रकार का संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने के कारण दोनों का तत्काल वेतन बंद करने का निर्देश दिया. अस्पताल में भर्ती प्रसूति महिलाओं से डीएम ने खाना एवं एंबुलेंस के बारे में पूछा तो मरीजों ने बताया कि– “बाबू एंबुलेंस कहां हमरा सब गरीबो कय मिलतै. हम्मै सब तक टैंपू पकड़ी कै यहां तक अइलौ छीए. इस बात को सुनते हैं डीएम ने अस्पताल प्रबंधक से पूछा कि एंबुलेंस की सुविधा मरीजों को क्यों नहीं मिल रही है तो उन्होंने बताया कि एंबुलेंस खराब है. इसके बाद वहां से निकल कर डीएम अस्पताल परिसर स्थित डेढ़ करोड़ की लागत से 35 बेड के बनाए गए नवनिर्मित अस्पताल भवन का 4 मंजिले छत का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे तो वहां जांच के क्रम में उन्होंने पाया कि भवन के छत के कई हिस्से में जगह जगह दरारें आ गई थी. इस पर उन्होंने स्वतंत्र रूप से अभियंताओं की टीम बनाकर घटिया निर्माण एवं गुणवत्ता की जांच का निर्देश दिया.

