नवगछिया : ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से प्रसिद्ध भागलपुर जिले के नवगछिया के पुनामा प्रतापनगर मंदिर की मैया की महिमा निराली है। यहां मां की प्रतिमा नहीं बनाई जाती है। यहां ज्योत और कलश की पूजा होती है। वहीं इस दुर्गा मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बताया जाता है कि राजा चंदेल के वंशज प्रताप राव ने 1526 में पुनामा प्रताप नगर में दुर्गा मंदिर की स्थापना की थी। इनके वंशज प्रवीण सिंह, जितेंद्र सिंह, विजयेंद्र सिंह, चन्द्र मोलेश्वरी सिंह बताते हैं कि इस दुर्गा मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। आखिर महिलाओं पर प्रतिबंध क्यों इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अपने स्थापना काल से ही मंदिर में तांत्रिक विधि से पूजा की जाती है इसलिए यहां महिलाओं का प्रवेश मना है यह ज्योत पहली पूजा से दशमी तक जलती रहती है। विसर्जन के समय लोगों की भीड़ के बीच जलती हुई ज्योत का विसर्जन किया जाता है।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि कोसी नदी के कटाव में तीन बार कटने के बाद 2003 में राजेंद्र कॉलोनी के पुनामा में मंदिर की स्थापना कर पूजा शुरू की गई। यहां कामरूप कामाख्या की तरह ही तांत्रिक विधि विधान से पूजा होती है। यहां अष्टमी एवं नवमी को पशुओं की बलि दी जाती है। नवमी को भैंसे की भी बलि दी जाती है। साथ ही पहली, तीसरी, पांचवीं और सातवीं पूजा को भी एक-एक पशु की बलि दी जाती है।

निशा पूजा पर होती है चौंसठ योगिनी पूजा
पुजारी बताते हैं कि पुनामा की दुर्गा मैया के दरबार में सच्चे मन से जो भक्त वर मांगते हैं, मैया उनकी मुराद अवश्य पूरी करती हैं। यहां सप्तमी को होने वाली निशा पूजा भव्य होती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भक्त मंदिर आते हैं। सप्तमी की रात्रि में निशा पूजा के दौरान माता के चौसठ योगिनी की पूजा होती है।
भक्त मन्नत पूरा होने पर लगाते हैं दंड
भक्त मंदिर में आकर मैया के सामने अपनी मुरादें पूरी करने की मन्नत मांगते हैं। इसके बाद मन्नत पूरा होने पर सुबह आकर मंदिर की चारों तरफ भक्त घसीटते हुए दंड लगाते हैं।
