इस्माइलपुर : गंगा का जलस्तर घटने के बाद भी बाढ़ से निजात नहीं, झोलाछाप नीम हकीम व तांत्रिकों के चक्कर में-Naugachia News

ऋषव मिश्रा कृष्णा, नवगछिया : गंगा के जलस्तर में अप्रत्याशित कमी आने के बाद भी नवगछिया अनुमंडल के इस्माइलपुर प्रखंड के लोगों को बाढ़ की समस्या से निजात मिलता नहीं दिख रहा है. इस्माइलपुर प्रखंड के पांचो पंचायत में आई बाढ़ का पानी गंगा के घटते जलस्तर के साथ गंगा नदी में नहीं उतरा और बाढ़ का पानी विभिन्न पंचायतों में ही फंस कर रह गया. पानी फंसने का कारण इसी वर्ष निर्मित सड़क छटठू सिंह टोला से इस्माइलपुर तक बनी सड़क है.
मालूम हो कि इस सड़क में जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था निर्माण के समय नहीं की गई जिसके कारण इन दिनों यह सड़क मेढ़ का काम कर रहा है. यह भी बता दे कि यह सड़क बाढ़ में अधिकांश जगहों पर ध्वस्त हो चुकी है लेकिन सड़क का टीला ही पानी को गंगा नदी में उतरने से रोक रहा है.

जिला पार्षद विपिन कुमार मंडल ने इस समस्या से नवगछिया अनुमंडल पदाधिकारी को लिखित रुप से अवगत कराया है और जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है. स्थानीय निवासी अवधेश शर्मा ने बताया कि अमुमन उन लोगों को हर साल एक माह तक बाढ़ का सामना करना पड़ता है लेकिन इस वर्ष एक माह बाढ़ का सामना करने के बाद भी उन लोगों को इस समस्या से निजात नहीं मिल पाया है.
आवागमन में लोगों को हो रही है परेशानी
मालूम हो कि आवागमन में समस्या के कारण पिछले दिनों ही इस्माइलपुर प्रखंड कार्यालय को नवगछिया प्रखंड मुख्यालय में शिफ्ट किया गया है. इन दिनों दिनांक इस्माइलपुर प्रखंड के सभी पंचायतों का जिला एवं अनुमंडल मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह से भंग है. लोगों को रोजमर्रा के सामानों के लिए भी काफी जद्दोजहद करना पड़ रहा है. करीब एक माह से प्रखंड में बाढ़ का पानी जमा रहने से लोग बीमार पड़ रहे हैं. आवागमन की व्यवस्था नहीं रहने के कारण लोग झोलाछाप नीम हकीम व तांत्रिकों के चक्कर में पड़ रहे हैं. अभी तक न तो समुचित रूप से क्लोरीन का वितरण किया गया है और न ही गेमेक्सिन या चुना का छिड़काव किया गया है. राहत व मुआवजा कार्य भी नगण्य है.
फसल बोआई में हो रही देरी 
सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन में बाढ़ का पानी जमा रहने के कारण किसान अब तक अपने खेतों में बुआई नहीं कर सके हैं. कृषक व मुखिया पति पूर्व मुखिया मनोहर मंडल, इस्माइलपुर के मूल निवासी मुकेश राणा ने कहा कि अगर जल्द से जल्द पानी नहीं निकला गया तो फसल पिछांत हो जाएगी और उपज की संभावना नहीं के बराबर होगी.

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