विक्रमशिला खुदाई स्थल के करीब ननसुतनगर कोठी गांव के पास गत दिनों मिट्टी कटाई के क्रम में मिले पालकालीन अवशेष ग्रामीणों के लिये आस्था का केंद्र बन गया है। अवशेषों को सलीके से रखकर स्थल पर महावीरी ध्वज खड़ा कर पूजा पाठ का दौर शुरू हो गया है। आसपास के गांवों के लोग विशेषकर महिलाएं फूल, नैवेद्य, अगरबत्ती जल आदि अर्पण कर रहे हैं तथा भक्ति भाव से शीश नवाकर मन्न्त मनौतियां भी मांग रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मालूम हो कि पिछले 17 मई को उक्त गांव के निकट एक टिलानुमा जगह पर जेसीवी मशीन से मिट्टी कटाई के क्रम में एक खंडित शिवलिंग, अरघा, नाग और पिलर के भाग मिले थे। उक्त अवशेषों के मिलने की खबर फैलते ही ग्रामीणों का हुजूम जुटने लगा तथा लोग इसे देवाधिदेव महादेव का प्रकटीकरण मानने लगे। हांलाकि उक्त अवशेषों के बावत अबतक ना तो स्थानीय प्रशासन और ना ही भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग ने सुधि लेने की जरूरत महसूस की है।

करीब 25 फीट ऊंचे टिल्हे पर मिले उक्त अवशेषों को देखने से प्रतीत होता है कि प्राचीन काल में वहां शिव मंदिर रहा होगा। हांलाकि उक्त टिल्हे की पूरी तरह खुदाई नहीं हो पाई है। अगर सलीके से खुदाई कराई जाय तो और भी पुरावशेष मिलने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
रानी दियारा गांव के नाटू मंडल, भवानीपुर गांव के छेदी मंडल और ननसुतनगर कोठी के अजय कुमार पांडे ने बताया कि उक्त टिल्हे को पूर्व में ग्रामीण गोसाईं मां टिल्ही के नाम से पुकारते थे तथा उक्त स्थल पर नाग देवता की पूजा करते थे। उक्त टिल्हा बिहार सरकार का है तथा इससे सटे कुछ लोगों की नीजी जमीन है। मिट्टी बेचने को लेकर टिल्हे की कटाई की जा रही थी कि इसी क्रम में शिवलिंग तथा इससे जुड़े अन्य पुरावशेष मिले। इन अवशेषों के मिलने से ग्रामीणों में आस्था का भाव उमड़ पड़ा है। उक्त स्थल पर ग्रामीणों ने मंडप का निर्माण कर आज से भक्ति सम्मेलन शुरू कर दिया है जिसके तहत भजन, कीर्तन आदि का सिलसिला चल पड़ा है।
