लवगुरु मटुकनाथ ने कहा मैं तो तैयार बैठा हूं… बस लड़की मिल जाए तो इसी दीवाली में धमाका मचा दूं

भागलपुर / पटना

पटना :  चर्चित लवगुरु, यानि मटुकनाथ चौधरी बुधवार को नौकरी से रिटायर हो गए। अपने बिंदास अंदाज और प्रेम की अलग परिभाषा सिखाने वाले मटुकनाथ ने रिटायरमेंट की घोषणा भी मज़ाकिया अंदाज में की। फेसबुक पोस्ट में लिखा कि वे अब शादी और मस्‍ती करेंगे, क्‍योंकि अभी तो उनकी जवानी ने अंगड़ाई ली है।
अपने इस पोस्ट व रिटायरमेंट के बाद उन्होंने विशेष बातचीत में कहा कि लव और मैरिज दो अलग-अलग बातें हैं और शादी करने की कोई उम्र नहीं होती। लड़की मिल जाए तो 65 साल की उम्र में मैं इसी दीवाली में धमाका मचा दूं। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश…

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प्रश्न- लोगों ने आपको लवगुरु की उपाधि दी, पहली बार सुनकर कैसा लगा?
उत्तर- मैं किसी दायरे में बंधकर नहीं रहा। मैंने प्यार को स्वीकारा, उसे नाम दिया। भले ही इसे लेकर विवाद हुआ और लोगों ने मुझे और मेरे प्यार को स्वीकार नहीं किया। समाज और समाज की मानसिकता के दायरे से बाहर जाकर कुछ हो तो बवाल मचना तो तय है। मैंने कभी ये नहीं सोचा कि लोग क्या सोचेंगे? मैंने जिंदगी जी है। मैंने प्यार किया और उस प्यार को जिया है, वो जिंदा है तभी मैं भी हूं।
किसी से प्रेम करना, उसका इजहार करना, गलत नहीं होता। प्यार को छुपाना और फिर कुंठित होकर जीना कई तरह की विकृत मानसिकता को जन्म देता है, जिसे लोग समझते नहीं हैं।

प्रश्न- शादीशुदा होते हुए 30 साल छोटी शिष्या के साथ लिव-इन में रहे। शादी क्यों नहीं की?
उत्तर- हां, मैं शादीशुदा था। लेकिन, मुझे जूली से प्यार हो गया और ये एकतरफा नहीं था, वो भी मुझे बहुत चाहती हैं। हम दोनों ने साथ रहने का फैसला लिया। समाज की नजर में ये अपराध था। लेकिन क्या शादी जीवन का अंतिम पड़ाव है? मैं एेसा नहीं मानता। जूली और मैंने जो 10 साल साथ रहकर जीवन जिया है, वो मेरे जीवन का स्वर्णिम समय था। साथ रहने के लिए शादी करना जरूरी तो नहीं।

प्रश्न- आपकी नजर में शादी की क्या अहमियत है?
उत्तर- मेरी नजर में खुशहाली, प्यार और जिंदादिल जिंदगी ये अहम हैं। अगर ये आपके जीवन में हैं तो फिर इसके अलावा किसी बंधन की जरुरत नहीं। शादी करना या ना करना, खुश रहना- ये आपपर निर्भर करता है। आप शादी से खुश हैं तो ठीक, नाखुश हैं तो फिर अापको जिंदगी बोझ लगने लगती है। शादी के बाद अापपर किसी का कानूनी हक हो जाता है।
शादी में कोई बंधन नहीं होना चाहिए। ना ही किसी पुरुष के लिए, ना ही किसी महिला के लिए। हर किसी को अपने हिसाब से जीवन जीने का अधिकार है। जिंदगी में प्यार होना चाहिए, तभी सच्चा सुख मिल सकता है। शादी करना या ना करना दो अलग-अलग बाते हैं।

प्रश्न- प्यार की क्या अहमियत है?
उत्तर- प्रेम जिंदगी में पूर्णता लाता है। आप किसी से भी प्रेम करें, उसे महसूस करें। प्रेम स्वार्थ से बंधा नहीं होना चाहिए। जहां स्वार्थ हो वहां प्रेम नहीं हो सकता। प्रेम का स्वरूप इतना व्यापक है कि इसकी व्याख्या करना किसी के लिए संभव नहीं है। प्रेम जीवन में सार्थकता लाता है, जिंदगी में पूर्णता का एहसास कराता है। जीवन में ये नहीं तो आप जिंदा होते हुए भी मरे के समान हैं।

प्रश्न- जूली के छोड़कर जाने का दुख होता है?
उत्तर- हां, शुरू में जब उन्होंने अचानक अध्यात्म का रूख किया और कहा कि अब मुझे जाना होगा। ये सुनकर दुख तो हुआ था, लेकिन अब किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होती है। मुझे खुशी है कि वो प्रेम का वास्तविक स्वरूप अध्‍यात्‍म में तलाश रही है। वो रिसर्च कर रही है। वो खुश है तो मैं भी खुश हूं। उसका झुकाव अध्‍यात्‍म की तरफ हो गया है और वो मेरा भी इंतजार कर रही है कि मैं भी उसकी राह पर निकलूंगा।

प्रश्न- फेसबुक पोस्ट्स पर लिखा कि 65 साल का लरिका हूं, अब शादी करना चाहता हूं। एेसा क्यों?
उत्तर- मैं सहज और सुलझा हुआ इंसान हूं। जैसा भाव अनुभव करता हूं, वैसा बता देता हूं। छिपाना नहीं जानता। जिंदगी को खुश होकर जीने में विश्वास करता हूं। हां, मैंने कहा कि मैं शादी करना चाहता हूं। तो इसमें बुरा क्या है? रिटायरमेंट के बाद अभी तो मेरी जिंदगी शुरू हुई है। अभी तो मैं जवान हुआ हूं और अब मैं स्वछंद हूं। अब अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी सकता हूं। मैं बहुत खुश हूं।

प्रश्न- तो बताएं, शादी कब करेंगे?
उत्तर- हंसते हुए, मैं तो तैयार बैठा हूं। बस लड़की मिल जाए तो इसी दीवाली में धमाका मचा दूं।