
नवगछिया। स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर नवगछिया स्थित मदन अहिल्या महिला कॉलेज परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) द्वारा संगोष्ठी एवं पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छात्रा सह प्रमुख साक्षी भारद्वाज ने कहा कि अभाविप स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में पूरे भारतवर्ष में राष्ट्रीय कार्यक्रम के तौर पर मनाती है। स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहे हैं।
अभाविप प्रांत एसएफडी सह संयोजक कुसुम कुमारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत के महान संत, विचारक और युवाओं के मार्गदर्शक थे। उन्होंने वेदांत और भारतीय संस्कृति का संदेश विश्वभर में फैलाया। वर्ष 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया।
वहीं कॉलेज इकाई की कॉलेज मंत्री मौसम कुमारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी युवाओं में आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करते थे। उनके विचार आज भी युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम में जिला प्रमुख डॉ. अमरेंद्र, छात्रा सह प्रमुख साक्षी भारद्वाज, प्रांत एसएफडी सह संयोजक कुसुम कुमारी, कॉलेज मंत्री मौसम कुमारी सहित कार्यकर्ता कोमल कुमारी, मुस्कान एवं अन्य अभाविप कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
वही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् नवगछिया द्वारा जी बी महाविद्यालय इकाई में राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष पर युवा संवाद एवं पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महाविद्यालय के शिक्षक एवं छात्रों ने हिस्सा लिया। महाविद्यालय अध्यक्ष सौरभ कुमार ने बताया कि अभाविप स्वामी विवेकानंद जी जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में पुरे भारत वर्ष में राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में मानती है।
स्वामी विवेकानंद भारत के महान संत, विचारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने दुनिया को वेदांत और भारतीय संस्कृति का संदेश दिया। 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में उनके ऐतिहासिक भाषण ने भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। स्वामी जी युवाओं में आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति का भाव जगाते थे। आज भी उनके विचार हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
छात्रा ज्योति ने बताया कि स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त एक प्रतिष्ठित वकील थे, जिनमें तर्क और आधुनिक सोच थी, जबकि माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक, करुणामयी और संस्कारवान महिला थीं। माता-पिता के इन दोनों गुणों का अद्भुत संगम नरेन्द्रनाथ के व्यक्तित्व में स्पष्ट दिखाई देता था।
सह मंत्री शशि ने बताया कि बाल्यकाल से ही नरेन्द्रनाथ असाधारण प्रतिभा के धनी थे। वे संगीत, साहित्य, दर्शन और खेल—सभी में निपुण थे। उनके मन में बचपन से ही एक प्रश्न गूंजता रहता था—“क्या ईश्वर हैं? यदि हैं, तो क्या किसी ने उन्हें देखा है?” यही प्रश्न आगे चलकर उन्हें आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले गया।
वही मौके पर विभाग संयोजक भागलपुर अनुज चौरसिया, जिला संयोजक गौतम साहू, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ सत्येंद्र सर,ज्योति, शशि, नवनीत, सौरभ आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।















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