नवगछिया : सूप पर मंजूषा पेंटिंग को उकेरने में लगी हैं.. सजी सूपे की अच्छी संख्या में बिक्री

नवगछिया। नवगछिया बाजार में छठ पर्व को लेकर  कलाकारों द्वारा मंजूषा पेंटिंग को सूप पर उकेरने का सिलसिला अंतिम चरण में है।  लोक आस्था के इस महापर्व में बांस से बने सूप, दउरा का बहुत महत्व है। व्रती इसमें ठेकुआ, फल-फूल व अन्य पूजा सामग्रियों को रखकर अर्घ्य देती हैं। बदलते ट्रेंड के साथ  अब सूप व डगरा पर भी नयापन का रंग चढ़ता जा रहा है। इस बार छठ को लेकर सूप एवं डगरा को मंजूषा पेंटिंग से सजाया जा रहा है।

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मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप को बाहर भी भेजे जा रहे हैं , जहां मंजूषा से जुड़ी हर चीज लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहा है। इस कला से जुड़ीं महिलाएं बांस के सूप के दोनों ओर मंजूषा पेंटिंग शैली में भगवान सूर्यदेव और कलश और नाग की तस्वीर उतार रही हैं। दउरा पर भी मंजूषा की पेंटिंग की कलाकारी लोगों का दिल जीत रही है।

इस तरह के सूप की कीमत कम से कम डेढ़ सौ से दो सौ रुपये आकार के अनुसार भी इसके दाम लिए जा रहे हैं। नवगछिया के मुकेश राणा और निवर्तमान पार्षद चम्पा कुमारी इस मंजूषा पेंटिंग को स्थानीय कलाकारों के बीच प्रोत्साहित कर रहे हैं और उनके बनाएं सामान को बाजार में उपलब्ध करा रहें हैं।

मंजूषा पेंटिंग करने वाली खुशीश्री बताती हैं कि इस बार बड़ी संख्या में लोग मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप की ओर पिछले दो वर्षों से आकर्षित हुए हैं। मेरे साथ करीब आठ दस महिलाएं इससे जुड़ी हुई हैं। नवगछिया के कुम्हार पट्टी और मनसा सदन के पास इसे तैयार किया जा रहा है। गोवर्धन पंडित, विक्की पंडित, राजनंदिनी, संगीता, सोनी व मंजू, प्रेमलता, रितू, जया, मुन्नी ने बताया कि पिछले कई वर्षों से मंजूषा पेंटिंग के से जुड़ी हैं।

बताया कि इस वर्ष दीपावली के मौके पर मंजूषा पेंटिंग से रंगे दिये भी अच्छी संख्या में बिक्री की गई। अगर प्रशिक्षण के साथ सरकार का सहयोग मिलेगा तो हमलोगों के  हुनर को भी पहचान मिल सकती है। इसमें परिवार का भी भरपूर सहयोग व प्रोत्साहन मिल रहा है। अधिक से अधिक लोगों तक मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप पहुंच सके, इसकी कोशिश की जा रही है। इसके जरिए छठ पर्व और ज्यादा आकर्षक बनाने की तैयारी है।

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