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नवगछिया : मौसम की मार.. लीची और आम की फसल तबाह, किसानों पर मंडराया संकट

बिहपुर (भागलपुर) में इस बार मौसम की बेरुखी ने लीची और आम के किसानों की कमर तोड़ दी है। तेज धूप और अनुकूल मौसम न मिलने से न सिर्फ फलन प्रभावित हुआ, बल्कि लीची के दाने पेड़ों पर ही झुलस गए, जिससे गुणवत्ता भी गिर गई।

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किसानों के मुताबिक इस साल लीची की पैदावार पिछले वर्ष के मुकाबले महज 5 से 20 प्रतिशत तक सिमट कर रह गई है। दानों का विकास ठीक से नहीं हो पाया और कई जगह फल धूप में जल गए। हर साल जहां 30 मई से देशी और 15 जून से ‘मनराजी’ लीची की तुड़ाई शुरू हो जाती थी, इस बार मनराजी प्रजाति से भी उम्मीद खत्म होती नजर आ रही है।

मौसम की मार का असर बाजार पर भी साफ दिख रहा है। दूसरे राज्यों से आने वाले खरीददार इस बार नहीं पहुंचे हैं। पहले जो बागीचा एक लाख रुपये में बिकता था, अब उसे 20 हजार रुपये में भी खरीदार नहीं मिल रहा।

प्रगतिशील किसान संजय कुमार चौधरी बताते हैं कि एक बागीचे पर करीब 30 हजार रुपये तक की लागत आती है, लेकिन इस बार लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। कई किसान नुकसान के डर से लीची तुड़वाने से भी बच रहे हैं।

आम की फसल की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। प्रतिकूल मौसम के कारण आम के उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की गई है। नवगछिया अनुमंडल में इस बार लीची और आम के किसानों को करीब 50 करोड़ रुपये तक नुकसान होने का अनुमान है।

बिहपुर प्रखंड में लगभग 700 एकड़ में लीची और आम की खेती होती है, जो यहां की प्रमुख आय का स्रोत है। ‘बिहपुरिया लीची’ की पहचान दिल्ली, यूपी, बंगाल, पंजाब और नेपाल तक है, जहां हर साल 7 से 8 करोड़ रुपये का कारोबार होता रहा है, लेकिन इस बार पूरा सीजन प्रभावित हो गया है।

किसानों के अनुसार एक एकड़ में लीची उत्पादन पर करीब 60 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि सामान्य स्थिति में 1 से 1.5 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस बार मुनाफा तो दूर, लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

लगातार खराब होते मौसम के कारण किसानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। यदि जल्द राहत या सरकारी सहायता नहीं मिली, तो आने वाले समय में इस क्षेत्र की बागवानी पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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