टीएमबीयू के दो और कॉलेजों में भी अब पीजी की पढ़ाई होगी। यूनिवर्सिटी ने टीएनबी, मारवाड़ी और एसएम कॉलेज को छोड़ अन्य सरकारी कॉलेजों में भी पीजी की पढ़ाई शुरू करने का प्रयास किया है। लेकिन फिलहाल जीबी कॉलेज नवगछिया और पीबीएस कॉलेज बांका का प्रस्ताव आगे बढ़ा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उक्त दोनों कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई शुरू हुई तो नवगछिया और आसपास तथा बांका के छात्रों को उनके क्षेत्रों में ही स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। अभी तक इन क्षेत्रों के छात्र यूनिवर्सिटी मुख्यालय स्थित पीजी विभागों में दाखिले के लिए जोर लगाते रहे हैं। पीजी विभागों में सीमित सीट होने से दाखिले की आपाधापी रहती है। टीएनबी, मारवाड़ी और एसएम कॉलेज में चल रहे पीजी कोर्स में ज्यादातर इन्हीं कॉलेजों के छात्रों को दाखिला मिलता है।
उच्च शिक्षा हर क्षेत्र तक पहुंचाने की सरकार की योजना के तहत विवि की पहल
हर जिले में पीजी की पढ़ाई की सरकार की है योजना


हाल ही में राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने टीएमबीयू समेत राज्य के विश्वविद्यालयों को अपने यहां के कम से कम एक सरकारी कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू करने का प्रस्ताव देने का निर्देश दिया था। हर जिले में एक सामान्य और एक सरकारी कॉलेज में पीजी की पढ़ाई की राज्य सरकार की योजना के तहत टीएमबीयू ने बाकी कॉलेजों में भी पहल की है।
पूर्व कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता के समय ही कॉलेजों से पीजी की पढ़ाई शुरू करने का प्रस्ताव मांगा गया था। इनमें जीबी कॉलेज नवगछिया और पीबीएस कॉलेज बांका ने प्रस्ताव दिया। सीसीडीसी डॉ. केएम सिंह ने बताया, जीबी कॉलेज ने पॉलिटिकल साइंस और इतिहास में पीजी शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।
पीबीएस कॉलेज में पंचायत चुनाव को लेकर प्रस्ताव भेजने में देरी हुई, लेकिन इस कॉलेज से कहा है कि वह अपने यहां स्नातक में जितने भी विषयों की पढ़ाई हो रही है और जिनमें नहीं हो रही, उन सभी विषयों में पीजी की पढ़ाई का प्रस्ताव दें।
टीएमबीयू के 3 कॉलेजों में हो रही है पीजी की पढ़ाई
सरकार के इस निर्देश से करीब 8 साल पहले ही टीएनबी, मारवाड़ी और एसएम कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। ऐसे में भागलपुर में अभी तीन सरकारी कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई हो रही है। नवगछिया गंगा पार है, इसलिए विश्वविद्यालय ने भागलपुर में ही रहने के बावजूद कॉलेज का प्रस्ताव भेजा, जबकि बांका में पीजी की पढ़ाई न होने से पीबीएस कॉलेज का प्रस्ताव भेजा गया।













