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नवगछिया : उस्मानपुर गांव के तीन किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की.. जनवरी से मार्च तक मिलेंगे फल

खरीक के उस्मानपुर गांव के तीन किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है उसमें से एक किसान न सिर्फ खेती बल्कि ड्रिप इरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई पाईप) से खेती शुरू की है। इससे न सिर्फ खर्च कम होंगे बल्कि उत्पादन भी अच्छा होगा।

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इन तीनों किसानों ने एक योजना के तहत बीएयू के सहयोग से चार साल पहले स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की थी। जिससे उन्हें काफी लाभ हुआ था। लेकिन इसमें पौधे को हर सप्ताह ही बोरिंग से सिंचाई कराना होता था। जिसमें पानी के साथ मोटर चलाने में डीजल पर भी काफी खर्च होता था। लेकिन इसमें से एक किसान खगेश मंडल ने ड्रिप इरिगेशन से ही खेती करने का निर्णय लिया। उसने इसके लिए कई महीने पहले से ही प्रखंड कृषि पदाधिकारी से संपर्क किया लेकिन कोरोना का कारण बताकर मामला उलझ गया और ड्रिप सिंचाई के पाइप नहीं मिल सके। इसपर उन्होंने किसी अन्य किसान जिसके यहां यह बेकार पड़ा था से संपर्क किया और पाइप लाकर लगा लिये।

खगेश मंडल सहित अन्य दो किसान धनंजय मंडल और विकास मंडल ने एक साथ करीब आधा एकड़ में करीब नौ हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाये हैं। जिसमें से सिर्फ खगेश के चार हजार पौधों पर ड्रिप से सिंचाई होता है। शेष पौधे सामान्य विधि से ही सिंचाई होती है।

लागत कम और आय ज्यादा

खगेश ने बताया कि इस ड्रिप से पौधों को उचित मात्रा में पानी मिल पाता है। जिससे न सिर्फ बिजली या डीजल का खर्च कम लगेगा बल्कि उत्पादन भी अच्छा होता है। बोरिंग से सिंचाई करें तो एक हजार पौधे पर करीब 25 हजार रुपये लागत होगी और 40 से 45 हजार रुपये के फल बिकेंगे। जबकि ड्रिप में करीब 20 हजार रुपये खर्च होगा और 70 से 75 हाजर रुपये की आय होगी। ड्रिप सिंचाई में पाइप के माध्यम से ही खाद या पोषक तत्व डाल देते हैं तो वह बर्बाद नहीं होता है और कम लगता है। ड्रिप से सिंचाई करने पर फल सड़ते नहीं हैं जबकि बोरिंग से खेत में पानी फैलाने से पूरा खेत भींग जाता है इसमें फल भी भींग जाते हैं और वह जल्दी सड़ने लगते हैं।

इकोफ्रेंडली मॉडल से होगी खेती

इन किसानों ने बताया कि पिछले साल इन किसानों ने वर्मी कंपोस्ट और गोबर का ज्यादातर प्रयोग किया था और कम से कम रसायनिक खाद का प्रयोग किया था। इस साल भी वे लोग इसी तरह इकोफ्रेंडली खेती करेंगे।

जनवरी से मार्च तक मिलेंगे फल

जनवरी के शुरू से इससे फल मिलने लगेंगे। जो मार्च तक तोड़े जा सकेंगे। यह करीब तीन सौ से चार सौ रुपये किलो बाजार में मिलते हैं। किसानों ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती से उनकी आय बढ़ेगी और व्यावसायिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

ड्रिप से घास पतवार कम आता है। जड़ तक सीधे हर चीज पहुंचाया जा सकता है। इसमें मजदूर की भी जरूरत कम होती है। इसकी गुणवत्ता अच्छी होने के साथ आकार भी बड़ा होता है। इस तरह हर तरह से फायदेमंद है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत इसपर 90 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है।

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