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अमेजन पर ऑनलाइन गांजा बिक्री.. गिरी गाज, कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज

मध्‍य प्रदेश के भिंड जिले के गोहद चौराहा पुलिस ने ड्रग्स की तस्करी के मामले में अमेजन पर गाज गिराई है. जानकारी के अनुसार मामले को लेकी कंपनी के कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत केस रजिस्टर करने का काम पुलिस की ओर से किया गया है. यदि आपको याद हो तो पिछले दिनों सूबे के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का मामले को लेकर बयान सामने आया था. उन्होंने कहा था कि अमेजन कंपनी के अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं. यदि ऐसा ही व्यवहार रहा तो उसके एमडी और सीईओ के खिलाफ कार्रवाई करने पर हम मजबूर हो जाएंगे.

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पुलिस ने बरामद किया था गांजा

यहां चर्चा कर दें कि भिंड जिले की गोहद चौराहा पुलिस ने 13 नवंबर को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 ख के तहत केस दर्ज करने का काम किया था. पुलिस ने गोहद चौराहा पर रहने वाले शख्‍स पिंटू उर्फ बिजेंद्र तोमर और ग्वालियर निवासी सूरज उर्फ कल्लू पवैया के पास से 21 किलो 734 ग्राम गांजा बरामद किया था. इस मामले में ग्वालियर के मुकुल जायसवाल और मेहगांव निवासी चित्रा बाल्मीक को भी पुलिस ने दबोचा था.

अब तक एक टन से अधिक गांजा ऑनलाइन सप्लाई

पुलिस के द्वारा पकड़े गये लोग कड़ी पत्ते की आड़ में अमेजन पर गांजे की तस्करी करते पाये गये थे. पुलिस ने करीब 22 किलो गांजा सहित अमेजन की पैकिंग के डिब्बे, रैपर, बारकोड टैगिंग आदि सामान बरामद किये थे जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया. बताया जा रहा है कि तस्करी विशाखापट्टनम से हो रही थी. पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाली बात ये सामने आई कि आरोपी अब तक एक टन से अधिक गांजा ऑनलाइन सप्लाई करने में कामयाब रहे.

अमेजन पर क्‍यों की गई कार्रवाई

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के क्रम में कई बातें सामने आई जिसके बाद अमेजन के अधिकारियों से सवाल किये गये थे. जो बात सामने आई है उसके अनुसार सूरज उर्फ कल्लू पवैया और मुकुल जायसवाल ने बाबू टेक्स नामक फर्जी कंपनी बनाने का काम किया. इसके बाद ASSL अमेजन कंपनी में सेलर के रूप में रजिस्टर्ड होकर STEVIA के रूप में अपने ग्राहकों को विशाखापट्टनम से गांजे की सप्लाई करने में लग गये. अमेजन ने पुलिस को दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं हालांकि ये दस्‍तावेज पुलिस को संतुष्‍ट नहीं कर पाई. यही वजह है कि ASSL अमेजन कंपनी के कार्यकारी निदेशकों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा 38 के तहत अपराध दर्ज करते हुए उन्हें आरोपी बनाने का काम पुलिस की ओर से किया गया.

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