TMBU में गजब, परीक्षा खत्म होने के अगले ही दिन रिजल्ट देकर बनाया रिकार्ड

भागलपुर / पटना

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय ने 18 मार्च तक बीएड सत्र 2017-19 की परीक्षा ली और अगले दिन 19 मार्च को रिजल्ट देकर नया रिकार्ड बनाया है। विश्वविद्यालयों द्वारा सत्र नियमित करने के लिए कुलाधिपति द्वारा दिए गए निर्देश के बाद इस उपलब्धि के लिए राज्यपाल सचिवालय ने कुलपति की प्रशंसा की है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने भी इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी की है।

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परीक्षा में करीब 19 सौ परीक्षार्थी शामिल हुए थे
बीएड की परीक्षा 5 मार्च को शुरू हुई थी। 13 तक सैद्धांतिक परीक्षा और 16 से 18 मार्च तक प्रायोगिक परीक्षाएं हुईं। 18 मार्च की शाम तक 12 कॉलेजों के रिजल्ट तैयार हो चुके थे। चार कॉलेजों के प्रैक्टिकल के अंक 19 मार्च की सुबह कॉलेजों ने दिए। उसके कुछ घंटे बाद टीएमबीयू ने रिजल्ट अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया। इस परीक्षा में करीब 19 सौ परीक्षार्थी शामिल हुए थे।

रिजल्ट निकालना टीएमबीयू के इतिहास में पहली बार
प्रभारी कुलपति प्रो. एलसी साहा ने बताया कि परीक्षा का आयोजन एवं पुस्तिकाओं का मूल्यांकन के लिए अतिरिक्त परीक्षक लगाये गए थे। उसी का परिणाम रहा कि परीक्षा के अगले ही दिन उसका रिजल्ट आ गया। परीक्षा नियंत्रक अरुण सिंह और टेबुलेशन निदेशक डा. पवन कुमार सिन्हा रिजल्ट निकालने में शुरू से लगे रहे। इस तरह परीक्षा के अगले दिन रिजल्ट निकालना टीएमबीयू के इतिहास में पहली बार हुआ है।

बाहर के शिक्षकों की बनायी टीम
उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के लिए विवि ने पहले ही भागलपुर से बाहर के शिक्षकों की एक टीम बनायी थी। इन लोगों से गोपनीय ढंग से कॉपियों की जांच कराई गई ताकि किसी तरह की कोई सिफारिश नहीं हो। इस प्रकार कॉपियों का मूल्यांकन करवा लिया गया। प्रभारी कुलपति प्रो. एलसी साहा व प्रतिकुलपति प्रो. रामयतन प्रसाद ने बताया कि भविष्य में पीजी और स्नातक की परीक्षा के लिए भी ऐसी ही तैयारी की जायेगी। ताकि जल्द से जल्द रिजल्ट निकाला जा सके।

परीक्षा शुल्क में एकरूपता हो
कुलाधिपति ने सभी बीएड कॉलेजों को परीक्षा शुल्क में एकरूपता लाने का आदेश दिया है। बीएड पाठ्यक्रम में संपूर्ण सत्र के लिए कुल परीक्षा शुल्क के रूप में 25 सौ रुपए की एकरूप राशि तय कर दी गई है। यह भी कहा गया है कि बीएड पोस्ट एप्स के माध्यम से बीएड शिक्षण की गुणवत्ता को भी विकसित किया जाए, ताकि राज्य में स्कूलों के लिए सुयोग्य शिक्षक उपलब्ध हो सकें।