देसी मैन और विदेशी मेम की लव स्टोरी ‘शाहजहां- ‘मुमताज’ की याद आ जाएगी

राष्टीय / अंतरराष्टीय

कनाडा की रहने वाली पत्नी ने अपने बिहारी पति के लिए एेसा किया है कि उनकी मुहब्बत एक मिसाल बन गई है। जिस तरह शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी अमर है और हमेशा रहेगी, ठीक उसी तरह इस पत-पत्नी का प्यार भी अमर है और रहेगा।

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21वीं सदी में 03 दिसंबर की तारीख बिहार के डेहरी के लिए ऐतिहासिक बन गई। एक एेसी ही प्रेम देखने मिली जिस कहानी में बिहार के लिए कनाडा में प्रवासी भारतीय की वतन की मिट्टी में दफन की इच्छा उसकी कनाडाई पत्नी ने पूरी कर दी।

कैनेडियन पत्नी कैरेन अंसारी ने अपने पति मुनु अ्ंसारी की आखिरी इच्छा काफी मुश्किलों के बाद पूरी की। मुमताज-शाहजहां वाली मुहब्बत हो या मातृभूमि से प्रेम। इस दिन मुनु अंसारी का शव दफन हुआ। उनके शव को 21 दिन की लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर यहां तीन दिसंबर को ला सकीं।

आंखें मिलीं, प्यार हुआ और बिहारी ने कनाडा में शादी की 

मुनु अंसारी भारत में पढ़ाई पूरी करने के बाद कनाडा चले गए। वहां आईसीटीएन के अध्यापक बने। अपनी मौत के समय वे एक होटल के डायरेक्टर थे। पढ़ाने के दौरान उन्हें मेडिसिन विज्ञानी परिन कैरेन मिलीं और दोनों की आंखें चार हुईं। प्यार हुआ और बाद में मुहब्बत को उन्होंने शादी का रूप देकर साथ-साथ जीने का फैसला लिया।

65 वर्ष की उम्र में मुनु अंसारी का देहांत कनाडा में गत 09 नवम्बर को हुआ। डेहरी में जन्मे प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी, द्विराष्ट्रवाद के प्रखर विरोधी और मोमिनों की राजनीतिक आवाज को बुलंद करने वाले गुलाम भारत के बहादुर अब्दुल कयूम अंसारी के भतीजे थे।

मुनु अंसारी की इच्छा को पत्नी ने किया पूरा 

उनके पिता का नाम कवि अंसारी था, जो कयूम साहब के छोटे भाई थे। इनका जन्म आज खंडहर बन गए तारबंगला स्थित अंसारी बिल्डिंग में हुआ था, जो अपने समय में राजनीतिक सामाजिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। कवि जी मैकेनिकल इंजीनियर थे। कैरेन के पति मुनु अंसारी की अन्तिम इच्छा थी कि उनके शव को अपने गांव बिहार के डेहरी में ही दफन किया जाए।

पति की मौत से आहत हैं कैरिन

मुनु अंसारी की पत्नी से बात करने वाले वारिस अली के अनुसार यह दंपति निःसंतान है। अभी वे कुछ भी बोलने से परहेज कर रही हैं। शोकमग्न हैं। बातचीत करने या लोगों से मिलने से परहेज कर रही हैं। इसलिए यह सवाल अभी अनुत्तरित रह गया है कि वे डेहरी में ही रह जाएंगी या सात समंदर पार पुनः पश्चिम को चली जाएंगी। इसके अतिरिक्त भी कई सवाल हैं, जिनके जवाब परिन कैरेन ही दे सकेंगीं।