चमकेगा भागलपुर का किस्मत, अंग के लाल को स्वास्थ्य मंत्रालय..

भागलपुर / पटना

अभी अभी कैबिनेट फेरबदल में भागलपुर के अश्विनी चौबे को मिला स्वास्थ्य मंत्रालय, ख़बर के साथ ही भागलपुर में जगह जगह मिठाई बाटने का दौर शुरू हो गया है।  इस नए बदलाव के साथ ही भागलपुर के लोगो का भागलपुर में AIIMS के स्थापना और मायागंज के कायाकल्प को ले उम्मीद फिर से जग गया है। कुछ दिन पहले ही भागलपुर में कुछ समाजिक ग्रूप ने AIIMS लाओ संघर्स समिति की स्थापना कर हस्ताक्षर अभियान छेड़ा था।

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वैसे श्री चौबे पहले भी काफ़ी लम्बे समय से मंत्री रह चुके है और देखना ये काफ़ी दिलचस्प होगा की हाल ही में सांसद बने निशिकांत दूबे ने देवघर का कायाकल्प मात्र सांसद के पद से कर दिया जिसमें की सबसे बड़ी उपलब्धि AIIMS, AIRPORT और सुनियोजित यातायात का डिवेलप्मेंट है जिसकी उम्मीद भागलपुरवासी कई दसको से करते आ रहे है। भागलपुर को पिछले दसको में काफ़ी बड़े मंत्रियो और पार्टी प्रवक्ताओं का सानिध्य मिला था, पर शहर के विकास पे अब तक जनता की निगाहे टकटकी लगाए वैसे ही बैठी है।

अश्विनी चौबे: एक परिचय

बिहार में बक्‍सर से लोकसभा सदस्‍य अश्विनी कुमार चौबे पांच दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं. उनको बीजेपी का अनुभवी और मंझा हुआ नेता माना जाता है. 1970 के दशक में जेपी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे. उन्हें आपातकाल के दौरान मीसा के तहत हिरासत में लिया गया था. ‘घर – घर में हो शौचालय का निर्माण, तभी होगा लाडली बिटिया का कन्यादान’ का नारा देने का श्रेय भी चौबे को जाता है. साथ ही, उन्होंने महादलित परिवारों के लिए 11,000 शौचालय बनाने में भी मदद की. मई 2014 के आम चुनाव में 16 वीं लोकसभा के लिए चुने गए. वह ऊर्जा पर संसद की प्राक्‍कलन एवं स्थायी समिति के सदस्य हैं. वह केंद्रीय रेशम बोर्ड के भी सदस्य हैं.

भागलपुर के दरियापुर के रहने वाले चौबे बिहार विधानसभा के लिए लगातार पांच बार चुने गए. वह 1995 – 2014 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे. वह बिहार सरकार में आठ साल तक स्वास्थ्य, शहरी विकास और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी सहित अहम विभागों के पदभार संभाल चुके हैं. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. वह 1974 से 1987 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे. चौबे ने 1967 – 68 में बिहार सरकार के खिलाफ छात्र आंदोलन में भाग लिया था. उन्होंने केरल में 1972-73 में अखिल भारत छात्र नेता सम्मेलन में भी भाग लिया था.

साल 2013 में अपने परिवार के साथ उन्होंने भीषण केदारनाथ बाढ़ का सामना किया था. उन्होंने इस आपदा पर ‘केदारनाथ त्रासदी’ पुस्तक भी लिखी है. उन्होंने प्राणि विज्ञान में बीएससी (ऑनर्स) किया है. योग में उनकी विशेष रूचि है.