अक्षय नवमी: पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति का व्रत आज , आंवला पूजन माना जाता है शुभ -Naugachia News

धर्म

नवगछिया :  अजीत पाण्डेय, द्वापर युग की शुरुआत कार्तिक शुक्ल नवमी को हुई थी, जो इस वर्ष 29 अक्तूबर को है। यह युगादि तिथि है। इसमें मुहूर्त आदि देखने की आवश्यकता नहीं होती है। व्रत, पूजा, तर्पण और अन्नादि का दान करने से अक्षय फल मिलता है। इसे अक्षय नवमी, धात्री नवमी भी कहते हैं। आज के ही दिन विष्णु ने कुष्मांडक दैत्य को मारा था। जिसके रोम से कुष्मांड-सीताफल की बेल निकली थी। इसी लिए इसे कुष्मांडक नवमी भी कहा जाता है। कुष्मांड में रत्न, सोना, चांदी, रुपया आदि रख कर दान करना शुभ माना जाता है। आज ही भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध से पहले तीन वन की परिक्रमा की थी, जिससे जनता में अत्याचारी कंस के प्रति विरोध जगा था। इसी कारण अक्षय नवमी पर मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा आज भी लाखों लोग पूरी श्रद्धा से करते हैं।

Whatsapp group Join

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

इस दिन को परम पवित्र आंवला नवमी भी कहा जाता है। आंवले के वृक्ष, जिसे धात्री भी कहा जाता है, की पूजा संतान प्राप्ति हेतु भी की जाती है। इस दिन पूजा-अर्चना करने और परोपकार के काम करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वृक्ष के नीचे पूर्व मुख बैठ कर इन मंत्रों का जाप करते हुए दूध चढ़ाना चाहिए- ‘पिता पितामहाश्चान्ये अपुत्रा ये च गोत्रिण:। ते पिबन्तु मया दत्तं धात्रीमूलेऽक्षयं

पय:।। आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं देवर्षिपितृमानवा:।
ते पिबन्तु मया दत्तं धात्रीमूलेऽक्षयं पय:।।’

अक्षत, पुष्प, चंदन से पूजा-अर्चना कर पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा बांध कर कपूर, बाती या शुद्ध घी की बाती से आरती करते हुए कम से कम सात बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए। इस दौरान विष्णु भगवान का ध्यान करें। पूजा-अर्चना के बाद खीर, पूड़ी, सब्जी और मिष्ठान का भोग संभव हो तो जरूर लगाए। आंवला के पेड़ की 108 बार परिक्रमा (अगर शारीरिक रूप से सक्षम हों तो) करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

कई लोग तो आंवला वृक्ष की छांव में ही भोज का आयोजन भी कराते हैं। देखा जाए तो आंवला पूजन पर्यावरण के महत्व का दर्शाता है, जागरूक करता है। प्रदूषण आदि से शरीर का बचाव करता है। आंवला पूजन करने से विवाहित महिलाओं को परम सौभाग्य की प्राप्ति होती है और चल रहा तनाव समाप्त होता है। श्रीहरि को प्रिय आंवला शरीर को सभी आवश्यक तत्व प्रदान करता है। पति-पत्नी के मधुर सबंध बनाने वाली औषधि तो यह है ही। इस दिन गौ, भूमि, वस्त्र, रत्न, सोना आदि का दान बहुत शुभ फल प्रदान करता है। नवमी के दिन पति-पत्नी पूजा-पाठ करें तो शान्ति, सद्भाव, सुख और वंश की वृद्धि होती है। पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति भी मिलती है।