भागलपुर गैंगरेप: हे भगवान नवगछिया की छात्रा से हैवानियत हुई या नहीं, अब देना होगा अग्नि परीक्षा

भागलपुर / पटना

भागलपुर : इंटर की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच मेडिकल बोर्ड से करायी जाएगी। एसएसपी मनोज कुमार ने इसे लेकर बुधवार को अस्पताल अधीक्षक को पत्र लिखा है। एसएसपी के पत्र पर अधीक्षक आरसी मंडल ने तीन डॉक्टरों वाली मेडिकल बोर्ड का गठन कर दिया है जो गुरुवार को जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। मेडिकल बोर्ड की टीम में डॉ. नूतन सिन्हा, डॉ. उपेंद्र नाथ और डॉ. संदीप लाल को शामिल किया गया है। डॉक्टरों की टीम जांच कर रिपोर्ट एसएसपी को सौंपेगी।

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कपड़े की होगी फोरेंसिक जांच 
पीड़ित छात्रा के कपड़े की फोरेंसिक जांच भी कराने का फैसला लिया गया है। एसएसपी ने बताया कि रविवार की रात छात्रा ने जो कपड़े पहने थे, उसके साथ उन कपड़ों को भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जायेगा जो मनीष के फ्लैट से बरामद हुआ था।

मनाली के पास से मनीष का साला गिरफ्तार
इस बीच पुलिस ने बुधवार को मनाली चौक के पास से मनीष का साला राजीव को गिरफ्तार किया है। राजीव मनीष से लगातार बातचीत कर रहा था। वह उसे भागने में मदद कर रहा था और भागलपुर में होने वाली गतिविधियों के बारे में भी बता रहा था। राजीव की निशानदेही पर पुलिस मनीष की तलाश में मंगलवार की देर तक छापेमारी करती रही।

जांच ठीक से नहीं हुई, इसिलए हुआ मेडिकल बोर्ड का गठन 
रविवार की रात लगभग साढ़े बारह बजे पीड़िता का वेजाइनल स्वाब लेकर जांच की गई थी। बताया जा रहा है कि उसकी रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो रही। ऐसे में सवाल उठा है कि क्या छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ? अगर नहीं हुआ तो छात्रा की हालत उतनी खराब क्यों थी? स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर का कहना है कि वेजाइनल स्वाब में स्पर्म नहीं मिलना यह तय नहीं कर सकता कि दुष्कर्म नहीं हुआ। जांच इस पर भी निर्भर करता है कि स्वाब कितनी गहराई से ली गई है और दुष्कर्म के कितनी देर बाद। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा गहराई से स्वाब नहीं लेने पर उसमें स्पर्म की मौजूदगी का प्रतिशत काफी कम हो जाता है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि यूट्रस के पास स्पर्म इकट्ठा हो जाता है। तीन दिन तक वह सक्रिय रहता है, जबकि चार से पांच दिन तक वह निष्क्रिय अवस्था में रहता है। वेजाइनल स्वाब एक्सपर्ट डॉक्टर को निकालना चाहिए पर अक्सर ऐसा होता है कि किसी नर्स को यह जिम्मेदारी दे दी जाती है। नर्स गहराई से स्वाब न लेकर ऊपर से स्वाब ले लेती है, जिससे सैंपलिंग ठीक से नहीं होती। इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है।