समय रहते नहीं चेते तो बेटे रह जाएंगे कुंवारे, लड़कों के लिए लड़कियां मिलनी मुश्किल हो जाएगी

भागलपुर / पटना

लखीसराय जिले के लोगों में बेटे की चाह और कन्या भ्रूण हत्या के बढ़ते चलन के कारण लड़के-लड़कियों के लिंगानुपात के अंतर में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि छह वर्षों में 61,680 लड़के के अनुपात में जन्म लेने वाली लड़कियों की संख्या गिरकर 56,038 पहुंच गई है। समाजशास्त्रियों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो जिले वासियों के लिए उनके लड़कों के लिए लड़कियां मिलनी मुश्किल हो जाएगी।

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यदि लोग अब भी नहीं चेते तो कल उन्हें बेटे को कुंवारा रखने को ही विवश होना पड़ेगा। उनका कहना है कि सभी लोग बेटे की चाह और कन्या भ्रूण हत्या जैसी घटनाओं पर रोक लगाकर ही इस चिंताजनक स्थिति से उबर सकते हैं। लड़के-लड़कियों के मौजूदा जन्म औसत दर देखने से ऐसा लगता है कि लोगों पर सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का भी कोई खास असर नहीं पड़ रहा है। तमाम सरकारी प्रयास व दावे के बावजूद जिले में ¨लगानुपात में वृद्धि होती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012-13 से 2017-18 जनवरी तक लखीसराय जिले में कुल 61,680 बालक एवं 56,038 बालिकाओं का जन्म हुआ है।

इस तरह छह वर्षों में लड़के की अपेक्षा 5,642 कम लड़कियों का जन्म हुआ। यह खतरे का संकेत है। जिले में 1,000 पुरुष के विरुद्ध महिलाओं की संख्या मात्र 902 है। हर वर्ष ¨लगानुपात की खाई बढ़ती ही जा रही है। सरकार की कन्या सुरक्षा योजना 2015 से जिले में संचालित है। विगत तीन वर्षों में आइसीडीएस के माध्यम से अब तक 2,342 बच्चियों का आवेदन यूटीआइ को भेजा गया। उसमें अबतक मात्र 940 बच्चियों को ही लाभांवित किया गया है। इस योजना के बावजूद ¨लगानुपात की स्थिति ¨चताजनक होती जा रही है। अल्ट्रासाउंड सेंटर पर नकेल कसने को लेकर पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट का सख्ती से पालन कराने को लेकर प्रतिमाह बैठक होती है। परंतु व्यवहारिक तौर पर उसका सख्ती से पालन नहीं कराया जाता है। ..

क्या कहतें हैं पदाधिकारी

जिले में ¨लगानुपात में हो रही वृद्धि पर रोक लगाने एवं कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट का पालन कराने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है तथा इसकी समीक्षा भी की जाती है। आइसीडीएस विभाग द्वारा कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने के लिए जिले में कन्या सुरक्षा योजना चलाई जा रही है। समय-समय पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का प्रचार-प्रसार कराया जाता है। विनय कुमार मंडल, डीडीसी