भागलपुर : काजीचक की कौशल्या देवी ने हाथ जोड़कर ईश्वर का धन्यवाद दिया और कहा कि भोलेनाथ ने बचा लिया नहीं तो पूरा परिवार बिखर जाता। वह त्रिकूट पर्वत पर रोपवे हादसे में करीब 24 घंटे फंसे रहने के बाद मंगलवार को भागलपुर अपने घर लौटने के बाद ईश्वर को धन्यवाद देते हुये बोल रही थीं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कौशल्या देवी ने कहा कि उनकी ट्रॉली लगभग पहुंचने वाली थी लेकिन हादसे के बाद से ट्रॉली फंस गई। कई घंटे तक कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने साड़ी को आधा खोलकर पल्लू लहराकर चिल्ला रही थी कि बचाओ…। लेकिन कोई नहीं आ रहा था। सिर्फ नीचे से अनाउंस हो रहा था कि पानी और खाना भेज रहे हैं लेकिन कोई मदद नहीं मिली। एक ट्रॉली में उनके अलावा भांजा नीरज और दोनों बेटियों अनन्या राज और अन्नू राज थे। जबकि दूसरी ट्रॉली में नीरज के दास्त मुन्ना और डिंपल भी सवार थे।
रविवार की शाम करीब चार बजे चढ़ने के कुछ ही मिनट बाद तेजी से ट्रॉली लहराने लगी और लोग चिल्लाने लगे। इस दौरान सिर में चोट भी लगी। लगा जैसे सब कुछ समाप्त हो गया। तीन-चार मिनट बाद वह फिर स्थिर हुआ। लेकिन लोगों की चिल्लाहट नहीं थम रही थी। घटना के बाद हमलोग मदद के लिये चारों ओर देख रहे थे, लेकिन घंटे गुजरते गये। रविवार की रात हुई तो राहत कार्य रोक दिया गया। लगा कि शायद रात नहीं काट पायेंगे और हमारा पूरा परिवार खत्म हो जायेगा। तेज हवा और अंधेरे में सभी लोग डरे सहमे थे। एक दूसरे को ढांढस बंधा रहे थे। उन्होंने बेटी का चेहरा दिखाते हुए कहा कि अभी भी वह सहमी हुई है और मुंह सूखा हुआ है। किसी तरह रात कटी और सोमवार की सुबह हुई तो लगा जैसे शायद अब कोई मदद मिलेगी। सोमवार दोहर एक बजे दो हेलेकॉप्टर भी आया लेकिन कोई मदद नहीं मिली। फिर चार बजे एक हेलीकॉपटर आया तो एक सैनिक ट्रॉली पर आया और बारी-बारी से दोनों ट्रॉली के छह लोगों को बेल्ट पहनाकर ऊपर खींच लिया। हेलीकॉप्टर में चढ़ने के बाद खुद पर विश्वास हुआ कि वे लोग बच गए हैं। कुछ ही देर में हेलीकॉप्टर ने एक जगह उतार दिया, जहां से उन लोगों को सदर अस्पताल ले जाया गया और फिर वहां जांच के बाद छोड़ दिया गया।

उन्होंने कहा कि वे ट्रॉली में मन्नत मांगी थी कि बच गईं तो बाबा बासुकीनाथ जरूर जायेंगे। इसलिए वे लोग दुबारा बाबा बासुकीनाथ के दर्शन पर मंगलवार दोपहर को भागलपुर पहुंचीं।
जिंदा रहे तो फिर मुलाकात होगी
नीरज ने कहा कि उन्होंने अपने मोबाइल से घर में सभी सदस्यों से बात की। सभी को कहा कि वे लोग आकाश और धरती के बीच फंसे हुए हैं। यदि जिंदा रहे तो फिर मुलाकात होगी। इसके बाद घर वाले रोने लगे। कुछ घंटे में ही पास में रखे दोनों मोबाइल डिस्चार्ज होने से स्विच ऑफ हो गया तो परिवार वाले और घबरा गये। मोबाइल स्विच ऑफ होने से वे लोग बचने की जो भी कोशिश कर रहे थे वह भी बंद हो गया। लेकिन घटना के आधे घंटे बाद ही नीचे पूरी प्रशासन पहुंच गई थी।
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कुछ ही घंटे में दर्जनों मित्र और रिश्तेदार पहुंच गये
नीरज ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही कुछ ही घंटे में भागलपुर के उनके दर्जनों मित्र और रिश्तेदार त्रिकूट पर्वत के नीचे पहुंच गये। लेकिन सभी लोग नीचे खड़े होकर बेबस थे। कोई भी प्रार्थना के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा था। हमलोग भी सिर्फ इश्वर की प्रार्थना कर रहे थे।
गिरते देखी तो और डर गई
कौशल्या ने कहा कि एक यात्री को हेलीकॉप्टर पर चढ़ाने की कोशिश की जा रही थी कि उसका बेल्ट खुल गया। उसे खींचने की कोशिश की गई लेकिन वह ऊपर नहीं चढ़ सका और नीचे गिर गया। इसे देख हमलोग काफी डर गये, लेकिन हेलीकॉप्टर के अलावा कोई सहारा भी नहीं था।
वापस लौटकर गई थी त्रिकूट
कौशल्या देवी ने कहा कि वे लो बासुकीनाथ धाम में पूजा कर वापस लौट रहे थे कि परिवार के सदस्यों ने कि त्रिकूट पर्वत भी घूम लिया जाये। काफी मना किया लेकिन बाद में गाड़ी वापस घुमाकर हमलोग त्रिकूट चले आये और इस हादसे में फंस गये।
