उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षा विभाग ने भागलपुर समेत हर जिले में इसके लिए पहल शुरू कर दी है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद न्यायालय ने शिक्षा विभाग को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था करने को कहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने सभी बीईओ व प्रधानाध्यापकों को उनके क्षेत्र के स्कूलों के सभी शिक्षकों व कर्मचारियों की सूची पता के साथ संबंधित थाना को सौंपने का निर्देश दिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!15 दिनों में उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है। शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि पुलिस सभी शिक्षकों व कर्मचारियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करेगी। यह देखा जाएगा कि उनपर कोई केस तो नहीं है। कोई आपराधिक मुकदमा तो दर्ज नहीं हुआ है। किसी अवांछित गतिविधियों में तो शामिल नहीं रहे हैं। स्कूल में पढ़ाने के अलावा और किस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं।


कई दागी शिक्षक व कर्मचारी : जानकारों का कहना है कि कई शिक्षक व कर्मचारी ऐसे हैं, जिनपर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। कई लोग अवांछित गतिविधियों में शामिल रहते हैं। स्कूल नहीं आकर वे ठेकेदारी, नेतागीरी और दूसरे कामों में संलिप्त रहते हैं। शराब के नशे में भी कई शिक्षक गिरफ्तार हो चुके हैं।
खगड़िया जिले के एक शिक्षक के बारे में आईजी को शिकायत मिली थी कि वह शिवसेना के संयोजक हैं। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से लिखे पत्र में कहा था कि वह शिक्षक कभी स्कूल नहीं आते हैं। सरकार के खिलाफ धरना, प्रदर्शन और दूसरे कार्यक्रमों में शामिल रहते हैं। शिकायत करने पर धमकाते हैं। उनकी बदली भी हुई, लेकिन रुक गई।
