15 दिवसीय पितृपक्ष 14 सितंबर से शुरू होगा और 28 सितंबर शनिवार अमावस्या के दिन संपन्न होगा। इस अवधि में गंगा घाटों व घरों पर अपने-अपने पितरों को लोग जल देंगे। पितृपक्ष में पितरों की मृत्यु तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है। इसमें देवताओं व मृतकों के नाम उच्चारण कर उसे जल दिया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि पितृपक्ष तर्पण 14 सितंबर शनिवार से प्रारंभ होगी। इससे पहले 13 सितंबर को प्रात: 6:46 से अगस्त्य मुनि का अर्घ्यदान होगा। इसके बाद व्रत की पूर्णिमा प्रारंभ होगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!14 से ही प्रतिपदा एकोदिष्ट का श्राद्ध प्रारंभ होगा जो प्रात: 8:52 के बाद किया जाएगा। इस बार त्रयोदशी तिथि का क्षय होने के कारण 26 सितंबर को त्रयोदशी का श्राद्ध होगा।
पितृपक्ष में अपने मृत पूर्वजों को याद कर उनका श्राद्ध करने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। श्राद्ध करने का अधिकारी बड़ा पुत्र को है अथवा नाती भी यह कार्य कर सकता है। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि पितृपक्ष में शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। यहां तक की तेल लगाना भी वर्जित है। ब्रह्मपुराण में वर्णित है कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में यमराज यमपुरी से पितरों को मुक्त कर देते हैं और वे अपनी संतानों तथा वंशजों से पिण्डदान के लिए पृथ्वी पर आते हैं।


अमावस्या के दिन तक घर के द्वार पर ठहरते हैं। जिन लोगों के माता-पिता स्वर्गवासी हो गए हैं उन्हें चाहिए कि वे इस पक्ष में प्रात:काल उठकर नदी, तालाब व गंगा में स्नान कर तिल, अक्षत, द्रव्य, फूल तथा हाथ में कुश लेकर वैदिक मंत्रों से सूर्य के सामने खड़े होकर पितरों को जल दें। उन्होंने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से प्रारंभ करके आश्विन कृष्ण अमावस्या तक पन्द्रह दिन पितरों का तर्पण और विशेष तिथि को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। पितरों के पूजन से मनुष्य को सुख-शांति के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। तीन ऋण मनुष्य के लिए कहे गए हैं। देवऋण, ऋषि ऋण, और पितृऋण। पितृऋृण को श्राद्धकर्म करके उतारना आवश्यक है।
पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए 15 दिन तक तर्पण करेंगे लोग
प्रतिपदा श्राद्ध 15 सितंबर रविवार
द्वितिया श्राद्ध 16 सितंबर सोमवार
तृतीया श्राद्ध 17 सितंबर मंगलवार
चतुर्थी श्राद्ध 18 सितंबर बुधवार
पंचमी श्राद्ध 19 सितंबर गुरुवार
षष्ठी श्राद्ध 20 सितंबर शुक्रवार
सप्तमी श्राद्ध 21 सितंबर शनिवार
अष्टमी श्राद्ध 22 सितंबर रविवार
नवमी श्राद्ध 23 सितंबर सोमवार
दशमी श्राद्ध 24 सितंबर मंगलवार
एकादशी श्राद्ध मंगलवार 11:52 तक
द्वादशी श्राद्ध 25 सितंबर बुधवार
त्रयोदशी श्राद्ध 26 सितंबर गुरुवार
चतुर्दशी श्राद्ध 27 सितंबर शुक्रवार
अमावस्या श्राद्ध 28 सितंबर शनिवार
