जोनल आईजी ने दोनों रेंज के डीआईजी और नौ जिलों के पुलिस कप्तानों की ली बैठक अब छोटी-मोटी शिकायतें भी पुलिस दर्ज करेगी। भले ही इन शिकायतों पर पुलिस केस रजिस्टर्ड नहीं करेगी, लेकिन थाने में रखे रजिस्टर में इन शिकायतों को दर्ज करना होगा। जोनल आईजी सुशील खोपड़े ने शुक्रवार दोनों रेंज डीआईजी और नौ जिलों के पुलिस कप्तान की बैठक में यह निर्देश दिया। आईजी ने बताया कि हर थाने को एक शिकायत पंजी रखना होगा। इस पंजी में वैसे मामले, जिसमें केस दर्ज न हो सकता है, उसे दर्ज करना होगा। जैसे रेश ड्राइविंग, चौक-चौराहों पर अड्डेबाजी, हुल्लड़बाजी, लड़कियों को देखकर फब्तियां कसना आदि। अगर एक लड़के के खिलाफ एक से ज्यादा शिकायतें दर्ज होंगी तो उनका नाम थानों के आदतन अपराधी की सूची में डाला जाएगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!थानों से ऐसे बदमाशों का चरित्र प्रमाण-पत्र या वेरीफिकेशन नहीं होगा। हर पर्व-त्योहार पर उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जाएगी। थानेदारों को निर्देश दिया गया है कि सप्ताह में कम से कम एक बार अपने क्षेत्र के प्रमुख इलाके में पैदल चले और लोगों से बात करें। गाड़ी में चलने के कारण थानेदार तक लोग अपनी बात नहीं पहुंचा सकते हैं। थानेदार पैदल चलेंगे तो इलाके के लोगों से उनकी बात होगी औरवे जनता भी जुड़ सकेंगे। थानों में आगंतुक पंजी भी रहेगी, जिसमें वहां आने वाले लोगों को अपना विवरण दर्ज करना होगा। इससे थानों में दलाल संस्कृति पर अंकुश लगेगा। भागलपुर प्रमंडल के एसएसपी, एसपी और डीआईजी के साथ बैठक करते आईजी सुशील मानसिंह खोपड़े। छोटी-मोटी शिकायतें अब थाने की शिकायत पंजी में होंगी दर्ज {एक अगस्त 2018 तक जिला वार लंबित के, की वर्ष और शीर्ष वार आंकड़ा, उनके लंबित रहने का कारण भी।

{हत्या, डकैती, लूट, फिरौती के लिए अपहरण, व अन्य प्रमुख शीर्ष (जनवरी से जुलाई 2018) में अपराध बढ़ोतरी वाले थानों को चिह्नित कर उनके द्वारा उदभेदन, गिरफ्तारी व अंतिम प्रपत्र समर्पित किये जाने से संबंधित अद्यतन रिपोर्ट { क्राइम कंट्रोल में विफल और अनुसंधान, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के प्रति लापरवाह व उदासीन थानेदार, आईओ के विरूद्ध की गई कार्रवाई का विवरण {वाहन चोरी (जनवरी 2018 से जुलाई 2018 तक) चोरी हुए वाहनों की कुल संख्या, बरामदगी की संख्या, वाहनों के प्रकार, गिरोह की पहचान व उसकी के संबंध में विवरण {एक अगस्त 2018 तक सांप्रदायिक दंगा से संबंधित लंबित केस, और उनके लंबित रहने के कारण समेत अद्यतन विवरणी {बैंक डकैती, बैंक लूट, कैश वैन लूट, डकैती, एटीएम लूट, चोरी, ग्राहक सेवा केंद्रों के संचालकों से लूट, डकैती के केसों का विवरण (जनवरी 2018 से जुलाई 2018 तक) {मॉब लिंचिग, मॉब वायलेंस से संबंधित केसों के अनुसंधान की अद्यतन स्थिति (वर्ष 2013 से जुलाई 2018 तक) {स्पीडी ट्रायल से संबंधित विवरणी {छेड़खानी, बलात्कार के मामलों के अनुसंधान की अद्यतन स्थिति (जनवरी 2018 से जुलाई 2018 तक) इन बिंदुओं पर ली गई जानकारी सीएम की समीक्षा बैठक को लेकर की गई चर्चा बैठक में आईजी ने चार सितंबर को होने वाली सीएम की समीक्षा को लेकर जिलावार क्राइम के ग्राफ, लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा की।

आईजी ने बताया कि पिछले पांच साल में जोन के किस जिले में कितना अपराध बढ़ा है या घटा है, इसकी समीक्षा की गई। अगर अपराध बढ़ा है तो उसकी क्या वजह है और अगर घटा है कि किस कारण से घटा है, इसकी भी जिला वार जानकारी ली गई। इससे संबंधित रिपोर्ट भी नौ जिलों के एसपी-एसएसपी से लिया गया। कुछ पुलिस कप्तान के प्रयास से जिलों में अच्छी पुलिसिंग हुई और उससे अपराध का ग्राफ कम हुआ।

उन पुलिस कप्तानों के प्रयास को दूसरे जिले में लागू करने पर भी विचार किया गया। बैठक में भागलपुर डीआईजी विकास वैभव, मुंगेर डीआईजी जितेंद्र मिश्रा, भागलपुर एसएसपी आशीष भारती, बांका एसपी चंदन कुशवाहा, नवगछिया एसपी निधि रानी, मुंगेर एसपी बाबू राम, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, बेगूसराय, खगड़िया समेत अन्य जिलों के पुलिस कप्तान मौजूद थे।
