भागलपुर : जिले में चमकी बुखार से चार बच्चाें की माैत हाेने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चाैबे ने मेडिकल काॅलेज अस्पताल अधीक्षक डाॅ. अारसी मंडल काे फाेन कर पूरे मामले की जानकारी ली। उन्हाेंने कहा कि बच्चाें की जान बचाने के लिए जाे भी उपाय किए जा सकते हैं, वह तत्काल करें। इससे पहले अस्पताल में रिजर्व किए गए बेड के अलावा देर शाम गाइनी के पेइंग वार्ड के 12 बेड एवं गाइनी के अाईसीयू के पांच बेड चमकी के मरीजाें के लिए रिजर्व कर दिए गए। एसएनसीयू के 12 एवं पीकू के 8 बेड पहले ही रिर्जव किए गए थे। अब कुल मिला कर मेडिकल काॅलेज अस्पताल के 37 बेड चमकी के मरीजाें के लिए रिजर्व रखे गए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सदर अस्पताल में भी दस बेड रिजर्व किये गए हैं। मायागंज अस्पताल में चमकी बुखार से संबंधित सभी तरह की दवाअाें काे अलग करवा दिया गया है। अस्पताल में बच्चाें के इलाज के लिए अब पीजी के डाॅक्टराें के अलावा सीनियर रेजिडेंट की ड्यूटी लगा दी गई है। पूरे मामले की जानकारी अधीक्षक ने स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव डाॅ. काैशल किशाेर काे दी गयी है। इधर सिविल सर्जन डाॅ. विजय कुमार सिंह ने सभी डाॅक्टराें की छुट्टी रद्द कर दी है। उन्हाेंने बताया कि चमकी से संबंधित किसी भी तरह के लक्षण मरीजाें काे दिखे ताे नशा मुक्ति केंद्र स्थित अारक्षित 10 बेड वाले वार्ड में शिफ्ट करें, जहां मरीज का बेहतर इलाज हाे सके।


कितनी अक्षम है हमारी चिकित्सा व्यवस्था : मेडिकल काॅलेज अस्पताल में चमकी बुखार से पीड़ित शिवानी काे भर्ती कराया गया, लेकिन हमारी अक्षम चिकित्सा व्यवस्था उसे नहीं बचा सकी। बच्ची की माैत हाेते ही उसकी मां गुड़िया देवी दहाड़ मार कर रोने लगी।
निर्देश के बाद भी रमण काे अाईसीयू में नहीं किया शिफ्ट डाॅक्टर से हाेगी पूछताछ
मेडिकल काॅलेज अस्पताल में चमकी (एइएस) ग्रसित बच्चाें के लिए भले ही प्रबंधन ने अाईसीयू के पीकू में अाठ बेड रिर्जव करने का निर्देश दिए हाें, लेकिन इसका पालन तीन बच्चाें की माैत तक नहीं हाे सका। तीनाें बच्चाें की माैत के बाद जब प्रबंधन ने सख्ती दिखाई ताे अलग-अलग विभागाें में 37 बेड रिर्जव हाे गए। दाेपहर 1.30 बजे जब एक बच्ची की माैत हुई ताे बभनगामा के पांच वर्षीय बालक रमण कुमार काे तत्काल इमरजेंसी से अाईसीयू में शिफ्ट करने का अधीक्षक डाॅ. अारसी मंडल ने निर्देश दिया। लेकिन उनके निर्देश काे अम्लीजामा पहनाने वाले जिम्मेदाराें ने ध्यान ही नहीं दिया। बच्चे का इलाज डाॅ. खलील अहमद के यूनिट मे चल रहा था। अधीक्षक ने बताया कि बच्चे काे पीकू या एसएनसीयू में भर्ती करने के निर्देश दाेपहर दाे बजे ही दिया था। इसके बाद भी बच्चे काे क्याें नहीं अाईसीयू में शिफ्ट किया गया, गुरुवार काे संबंधित डाॅक्टर से पूछताछ करेंगे।

अस्पताल में अब हर माैत परिजनों को चमकी से ही लग रही
मेडिकल काॅलेज अस्पताल में कुछ अन्य बच्चाें की भी माैत बुधवार काे हुई। अब परिजनाें काे लग रहा है कि उनकी बच्चाें की माैत भी कहीं चमकी बुखार से ही ताे नहीं हुई। बेलहर के खेसर गांव निवासी सुनील शर्मा की तीन साल की बेटी सोनाक्षी कुमारी की मौत बुधवार की दाेपहर 2.15 में हो गयी। परिजनाें ने भी कहा कि उसे चमकी की बीमारी हुई थी। हालांकि सोनाक्षी का इलाज करने वाले शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. खलील अहमद ने कहा कि उसकी मौत का कारण चमकी नहीं था।
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लचर : अानंद
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के रिसर्च विभाग एवं मैनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन अानंद माधव ने कहा कि मुजफ्फरपुर में चल रहे एइएस बीमारी अब मोतिहारी, शिवहर, वैशाली और भागलपुर तक फैल चुका है। भागलपुर में तीन बच्चों की मौत इस बीमारी से हो गई। राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लचर नजर अा रही है। अगर सरकार ढंग से इसका प्रचार-प्रसार भी करती तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती। उन्हाेंने सरकार से मांग की है कि इसे तुरंत राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।
चमकी बुखार की राेकथाम में सहायक हाे सकती हैं हाेम्याेपैथी दवाएं : डाॅ. नीतीश
डॉ. नीतीश दुबे ने कहा कि चमकी बुखार की राेकथाम में हाेम्याेपैथी दवाएं सहायक हाे सकती हैं। चमकी मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर व संक्रामक बीमारी है। कोशिकाओं में सूजन आने से ये बीमारी होती है। इसका वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में प्रवेश कर प्रजनन शुरू कर देता है। इसी रास्ते से यह मस्तिष्क में प्रवेश करता है और खतरे को बढ़ा देता है। बच्चों के शरीर की इम्युनिटी कम होती है। इस वजह से ये सॉफ्ट टारगेट हो जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पीड़ित बच्चों के शरीर में पानी की कमी न होने दें। खानपान का विशेष ध्यान रखें। चमकी से ग्रस्त मरीजों में शुगर की कमी देखी जाती है। बच्चों को मीठी चीजें नियमित रूप से खाने को दें। कोई भी व्यक्ति हरिओम होमियो से इस बीमारी की दवाएं ले सकता है।

लचर स्वास्थ्य सेवा के विरोध में माले ने किया प्रदर्शन
भागलपुर | मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से पीड़ित 150 से अधिक बच्चों की अस्पतालों में समुचित इलाज के अभाव में हुई मौत के खिलाफ लचर स्वास्थ्य व्यवस्था काे लेकर भाकपा माले के कार्यकर्ताअाें ने नगर प्रभारी मुकेश मुक्त के नेतृत्व में बुधवार काे प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को बर्खास्त करने, चमकी बुखार को राज्य आपदा घोषित करने समेत कई मांगें की गईं। उधर, नाथनगर में भी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री से विशेष चिकित्सा उपलब्ध कराने की मांग की है।
लक्षण : लगातार बुखार, बदन में ऐंठन, दांत पर दांत दबाए रखना, कमजोरी, बेहोशी, चिउंटी काटने पर शरीर में कोई गतिविधि न होना।
सावधानी : खाने से पहले और खाने के बाद हाथ जरूर धुलवाएं। साफ पानी पिएं। बच्चों के नाखून नहीं बढ़ने दें। गर्मी में बाहर खेलने के लिए न जाने दें। बच्चे को सड़े हुए या जूठे फल नहीं खाने दें।
हाेमियाेपैथी दवाएं : एजाडिडक्टआ मदर टिंक्चर 5 बूंद सुबह, जेल्सीमियम-200 सुबह में 3 बूंद। बुखार होने पर जेल्सीमियम 200 और आर्सेनिक एल्ब 200 बारी-बारी से उपयोग करें। ये दवाएं एक सप्ताह तक लेनी होगी।
