जिला प्रशासन ने पटना में 31 मर्इ तक लॉकडाउन बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार को दिया है। 5 मई को जारी लॉकडाउन की मियाद 15 मई को खत्म हो रही है। लॉकडाउन का असर यह हुआ है कि जिले में संक्रमण दर में कमी आई है। बुधवार को लॉकडाउन को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेसिंग आयोजित की गयी थी। प्रशासनिक पदाधिकारियों के मुताबिक ज्यादातर जिले के डीएम ने लॉकडाउन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। पटना शहर में संक्रमित मरीजों की संख्या सबसे अधिक है जो अब लगातार घट रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ऐसे में लॉकडाउन बढ़ाने से स्थिति में जल्द सुधार होने की संभावना है। सूत्रों की मानें तो जिलाधिकारियों ने शादी-विवाह समारोहों में लोगो की संख्या और घटाने का सुझाव मुख्य सचिव को दिया है। वजह यह है कि ग्रामीण इलाकों की में शादियों में भीड अधिक हो रही है। इसे रोकने के लिए अब केवल परिवार के सदस्यों को ही विवाह में शामिल होने की अनुमति दिए जाने पर सभी डीएम एकमत थे। तर्क था कि इससे संक्रमण का खतरा कम होगा। ऐसी स्थिति शादियों में मौजूदा 50 लोगों की उपस्थिति की संख्या घटाने पर सरकार विचार कर सकती है।

मुख्यमंत्री बोले-लॉकडाउन से कम हो रहा कोरोना का केस, रिकवरी रेट में भी बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों से, कोरोना के खिलाफ एकजुट होकर दृढ़ इच्छाशक्ति व सकारात्मक सोच के साथ मुकाबला करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से कोरोना संक्रमण कम हो रहा है, रिकवरी रेट लगातार बढ़ रही है। हम सब मिलकर कोरोना को जरूर हराएंगे। दुनिया भर के लोगों की तरह हम भी कोरोना से जूझ रहे हैं। बिहार में पिछले वर्ष इस बीमारी से लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कई कदम उठाये गये थे। परिणाम हुआ था कि 8 मार्च 2021 को कोरोना के मरीजों की संख्या घटकर मात्र 248 रह गयी।
मार्च के बाद कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में मरीजों की संख्या में अचानक तेजी आई है। इसे देखते हुए एक लाख से अधिक जांच प्रतिदिन हो रहा है। आवश्यक दवाओं के साथ अस्पतालों में व्यवस्था की जा रही है। संक्रमण को देखते हुए 15 मई तक 10 दिन का लॉकडाउन है। लॉकडाउन से मरीजों की संख्या में कमी आनी शुरू हो गई है। चिकित्सकों, चिकित्साकर्मियों, सफाईकर्मियों, प्रशासन और पुलिस सहित सभी कोरोना योद्धा सराहनीय काम कर रहे है। इस बार की लहर में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। संक्रमण की दर में धीरे-धीरे कमी आ रही है। रिकवरी दर निरंतर बढ़ रहा है।
