बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज नियम में किया गया यह बदलाव, आपत्ति की समय

भागलपुर / पटना

पटना. बिहार भूमि दाखिल खारिज नियमावली में बदलाव कर दिया गया है़ दाखिल -खारिज के आनलाइन आवेदन के निष्पादन की समय सीमा को बढ़ाकर 35 दिन कर दिया गया है़. अभी तक यह समय सीमा 18 दिन की थी़ पहले आपत्ति की समय सीमा 60 दिन थी़. अब 75 कार्यदिवस कर दिया गया है़. कागजातों की जांच केंद्रीयकृत प्रणाली द्वारा की जायेगी़. कागजात सही पाये जाने पर उसे संबंधित सीओ के भेजने के बाद अभिलेख खोला जायेगा़. अंचल निरीक्षक से जांच रिपोर्ट मिलने के तीन दिन में ऑटोमैटिक आम एवं खास सूचना जारी हो जायेगी़. राज्य सरकार द्वारा बिहार भूमि दाखिल-खारिज नियमावली में संशोधन के लिये कैबिनेट ने 18 सितंबर को अपनी मंजूरी दी थी़. गजट होते ही नये नियम लागू हो जायेंगे़. विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह द्वारा विस्तार से इसकी जानकारी दी गयी है़.

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एसएमएस से मिलेगा टोकन नंबर

ऑनलाइन माध्यम से दाखिल-खारिज के लिये आवेदन – याचिका प्राप्त होने पर आवेदन करने वाले को एसएमएस के जरिये टोकन नंबर दिया जायेगा़. अंचल स्तर पर केंद्रीकृत प्रणाली के तहत गठित टीम तीन कार्य दिवस के अंदर आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेजों की जांच करेगी़. कागजात पूरे होने पर अनुशंसा की रिपोर्ट लगाते हुये सीओ को भेज (अग्रसारित) दिया जायेगा़.

राजस्व कर्मी को सात दिन में देनी होगी रिपोर्ट

ऑनलाइन दाखिल-खारिज का वाद अभिलेख (संख्या एवं वर्ष सहित) तीन कार्य दिवस में खोला जायेगा़ इसकी सूचना एसएमएस के जरिये दी जायेगी़. आवेदनकर्ता आॅनलाइन पोर्टल पर भी वाद संख्या देख सकता है़. इसके बाद अंचल अधिकारी राजस्व कर्मचारी को मामले की जांच के आदेश देगा़ राजस्व कर्मचारी को सात कार्य दिवस में अपनी रिपोर्ट अंचल निरीक्षक को प्रस्तुत करेगा़ अंचल निरीक्षक तीन कार्य दिवस में सीओ को अपनी रिपोर्ट देगा़. जमाबंदी पंजी-एक में अंकित लिपिकीय त्रुटि को ठीक कराने तथा लगान रसीद जारी होने के बाद समस्याओं के के निराकरण के लिये निर्धारित प्रारूप पर सीओ को आवेदन देना होगा़.

बढ़ गयी थी म्यूटेशन के लंबित मामलों की संख्या

म्यूटेशन के मामलों को समय से निष्पादन के लिये डीसीएलआर और सीआे के काम भी मूल्यांकन शुरू कर दिया गया था़. प्रक्रिया आॅनलाइन होने के कारण राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारी उस आवेदन को खारिज करने में जरा भी देर नहीं कर रहे थे. जिसके दस्तावेज पूरे नहीं होते थे़. इससे अपील और लंबित मामलों की संख्या बढ़ने लगी थी़.