नवगछिया : मानसून आने से पूर्व नवगछिया अनुमंडल में बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसके लिए जल संसाधन विभाग द्वारा गंगा और कोसी नदी के सभी कटाव स्थलों को दुरुस्त कर दिया गया है। किसी भी गांव में बाढ़ जैसी आपदा न आए इसलिए तटबंधों पर सुरक्षा हेतु होमगार्ड के साथ-साथ डेढ़ दर्जन अभियंताओं की टीम की प्रतिनियुक्ति की गई है। संवेदनशील तटबंधों और कटाव स्थलों पर 24 घंटे बिजली की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मोबाइल यूनिट को रखा गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एंटी रोजन और फ्लड फाइटिंग कार्य के लिए कटाव स्थलों पर पांच-पांच हजार बोरियों में बालू भरकर रखा जा रहा है। साथ ही खाली बोरियों भी रखी जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर उसमें बालू भरकर कटाव स्थलों पर डाला जा सके। इसके अलावा जिओ बैग और पत्थर को भी स्टॉक में रखा गया है। किसी भी तरह की समस्या होने पर जिला मुख्यालय से जुड़े रहने के लिए वायरलेस सेट लगाया गया है, जिससे गंगा और कोसी नदी के जल स्तर में वृद्धि की पल-पल की खबर मुख्यालय को मिलती रहेगी।

बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले इस्माइलपुर से बिंदटोली, राघोपुर बागजान, नारायणपुर के नगरपारा, रंगरा के मदरौनी आदि जगहों पर विशेष तौर पर निगरानी रखी जा रही है। कटाव स्थल विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम भी तैनात होगी, जो तत्काल किसी भी तरह का निर्णय ले सकेगी। टीम में सेवानिवृत्त अभियंता प्रमुख उमाशंकर सिंह सहित दो अन्य सेवानिवृत्त अभियंता रहेंगे। ये 15 अक्टूबर तक नवगछिया में कैंप करेंगे।
नवगछिया अनुमंडल में बाढ़ से प्रभावित इलाका :
गंगा नदी के उफनाने से इस्माइलपुर प्रखंड का पूरा इलाका बाढ़ की चपेट में आ जाता है। इससे 50 हजार की आबादी प्रभावित होती है। गंगा का पानी गोपालपुर प्रखंड का अजमाबाद गांव भी घुस जाता है। बिहपुर प्रखंड में कोसी नदी से हरियो, कहारपुर, बड़ी खाल और आहूति गांव बाढ़ से प्रभावित होता है। बाढ़ आने पर यहां के लोगों को सीमावर्ती मधेपुरा जिले में जाकर शरण लेना पड़ता है।

रंगरा प्रखंड की तीन पंचायतें मदरौनी, चापर, तिनटंगा दियारा दक्षिणी कोसी नदी के बाढ़ से प्रभावित होती है। खरीक प्रखंड में कोसी नदी से लोकमानपुर, सिंहकुंड, भवनपुरा, मैरचा, चोरहर, ढोढिया दादपुर, कालीचक गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। जबकि गंगा नदी से राघोपुर पंचायत, खैरपुर और लत्तीपुर पंचायत के दर्जनों गांव प्रभावित होते हैं। नवगछिया प्रखंड में 11 किमी लंबे जमींदारी गंगा तटबंध सुरक्षित है।
