बिहपुर : ई. आशुतोष का हत्यारोपित पूर्व थानाध्यक्ष अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। वह कहां है, उसका अब तक सुराग नहीं मिल पाया है। उसे आसमान निगल गया या जमीन, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। फिर भी उसका पता नहीं चल पाया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बीते 24 अक्टूबर को बिहपुर पुलिस की बेरहमी से पिटाई के कारण प्रखंड के मड़वा पश्चिम पंचायत के वार्ड नंबर सात निवासी युवक ई. आशुतोष पाठक की 25 अक्टूबर की सुबह मौत हो गई थी। स्वजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मृतक की पत्नी स्नेहा पाठक व दो वर्षीय पुत्री माडवी पाठक की कुछ दिन पूर्व ही हंसती-खेलती दुनिया उजड़ चुकी है। इस घटना को लेकर मृतक के घर समेत पूरे मड़वा गाव में मातम हुआ पसरा है।

मृतक की दादी प्रभा देवी ने बताया कि शहर में पढ़ने व रहने के बाद भी उनका पोता हर साल नवरात्र में अपने कुल देवता व दुर्गा पूजा करने गाव आता था। कुछ माह पूर्व लीवर की बीमारी होने पर भी वह हंसता ही रहा, लेकिन पुलिस वालों ने उसकी जान ही ले ली। वहीं चाचा सुमन पाठक, संजय पाठक, प्रफुल्ल पाठक समेत चाची बिंदु देवी, संगीता देवी, मोना पाठक, बबली देवी, अक्षय पाठक, अंकित पाठक व शुभम पाठक आदि ने बताया कि आशुतोष इस बार भी नवरात्र में अपने कुलदेवता व दुर्गा पूजा करने 24 को ही गोड्डा से बाइक से पत्नी व बच्ची संग मड़वा आया था। 24 को ही भ्रमरपुर से पूजा कर लौटने के दौरान मड़वा महंतस्थान चौक के पास उसके काल के रूप में खडे़ पुलिस वालों ने आशुतोष उससे सदा के लिए छीन लिया।
मामले में दर्ज प्राथमिकी के बाद एसडीपीओ दिलीप कुमार के नेतृत्व में गठित एसआइटी टीम द्वारा अब तक एक एएसआई, दो होमगार्ड व थाना वाहन का निजी चालक समेत चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि फरार मुख्य आरोपी पूर्व थानेदार रणजीत कुमार की गिरफ्तारी की ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है। पूर्व थानेदार के घर की कुर्की-जब्ती होने बाद उसे बर्खास्त करने की भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। मामले में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लिए संज्ञान के बाद जाच रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किनी को समíपत करने का आदेश दिया गया था। जिसके बाद मामले की जाच में प्रमंडलीय आयुक्त चार दिन के अंदर दो बार बिहपुर पहुंच चुकी है। मामले पर डीआइजी सुजीत कुमार भी अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।
