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नवगछिया : पुल ध्वस्त होने से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, मरीजों की रास्ते में ही मौत

नवगछिया : पुल गिरने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है। स्थिति यह है कि अब बिहपुर सीएचसी से गंभीर मरीजों को भागलपुर के बजाय पूर्णिया रेफर किया जा रहा है। मंगलवार को तीन मरीजों—मड़वा गांव के कुमोद मिश्रा, गंगा देवी और बिहपुर के डॉ. बीपी यादव—को पूर्णिया भेजा गया। इनमें किडनी रोग से पीड़ित कुमोद मिश्रा की रास्ते में ही मौत हो गई।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि मायागंज अस्पताल उत्तर बिहार की लाइफलाइन माना जाता है। पहले एंबुलेंस महज 15 मिनट में पुल पार कर अस्पताल पहुंच जाती थी, लेकिन पुल ध्वस्त होने के बाद अब यह सुविधा पूरी तरह बाधित हो गई है। अनुमंडल के अधिकांश मरीजों को मजबूरी में पूर्णिया रेफर करना पड़ रहा है।

पुल बाधित होने से सबसे ज्यादा दिक्कत गंभीर मरीजों को उठानी पड़ रही है। मंगलवार को परबत्ता से एक मरीज छोटू नाव के सहारे इलाज कराने बरारी घाट पहुंचा। उसके पैर में स्टील लगा हुआ है और उसे डॉ. मनोज कुमार के यहां इलाज के लिए जाना था। नाव से उतरने के बाद परिजनों ने उसे गोद में उठाकर घाट तक पहुंचाया।

मौके पर मौजूद डीएम ने स्थिति को देखते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलाने का निर्देश दिया। छोटू को पहले टेंट में बैठाया गया और फिर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। डीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि घाट पर हर समय एंबुलेंस उपलब्ध रहे, ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

हालांकि, इलाज के बाद छोटू उसी दिन घर नहीं लौट सका। शाम करीब छह बजे घाट पहुंचने पर उसे पता चला कि प्रशासनिक निर्देश के अनुसार नाव का परिचालन शाम पांच बजे तक ही होता है। इस कारण उसे रात भागलपुर में ही एक परिचित के यहां रुकना पड़ा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक मरीजों की परेशानी कम होना मुश्किल है।

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