सुलतानगंज में रेफरल अस्पताल में कमीशखोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि फिर नवगछिया में पीएचसी में गड़बड़ी की बात सामने आने लगी। इस बार नवगछिया में सरकारी कार्यक्रम को परिवार का कार्यक्रम बनाकर लाखों रुपया की हेराफेरी की है। मामला राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) से जुड़ा है। जहां कार्यरत केंद्र के प्रभारी डॉक्टर वरुण कुमार ने पद का फायदा उठाते हुए सरकारी योजना के लिए मिली राशि को अपने पिता और पत्नी के खाते में ट्रांसफर करवा लिया। इस बात की जानकारी उनके ही विभाग के रिपोर्ट से मिली है। जिसमें पत्नी और पिता के खाता का सारा सच है। इस कागज में सारी जानकारी सामने आई है।
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आरबीएसके में पिता व उत्प्रेरक में पत्नी को पहुंचाया फायदा
सूत्रों ने बताया कि नवगछिया पीएचसी प्रभारी ने आरबीएसके में जमकर धांधली की। योजना में उन्होंने पिता को लाभ पहुंचाया है। उनके खाते में फर्जी तरीके से लाखों रुपए का भुगतान कराया। उत्प्रेरक के नाम पर पत्नी सोनम सोनी के एसबीआई के आईएफएससी खाता संख्या 2025873693 और आधार संख्या 799421884924 के नाम पर लाखों रुपए की अवैध निकासी की। जैसे यह सरकारी नहीं प्राइवेट संस्था हो।

कोरोना काल में मिली राशि में भी बंदरबांट का आरोप
प्रभारी डॉक्टर ने कोरोना काल में अस्पताल को सुद्ढ़ करने के लिए सरकार की तरफ से मिली लाखों रुपए की राशि का भी बंदरबांट किया है। सूत्रों ने बताया कि रुपया अस्पताल के विकास में खर्च नहीं कर कर्मियों के खाते में ट्रांसफर हुआ। अगर इसकी जांच हो तो गड़बड़ी सामने आएगी।
प्रभारी डॉक्टर ने कहा- आरोप गलत, मेरी छवि धूमिल करने को साजिश
नवगछिया के अस्पताल प्रभारी वरुण कुमार ने मामले पर पर कहा कि सभी आरोप गलत हैं। आरबीएसके में कोई भी अपनी गाड़ी दे सकता है। इसमें कहीं भी यह नहीं लिखा है कि परिवार के लोग गाड़ी नहीं दे सकते हैं। योजना के लिए गाड़ी नहीं मिलती है। मैं खुद गाड़ी खोज रहा हूं। वहीं पत्नी ने कोरोना काल में उत्प्रेरक का काम किया था, उसी के पैसे का भुगतान किया गया है। उन्होंने काम किया तो उसका पैसा दिया गया, यह कहीं से गलत नहीं है। डॉ. वरुण कुमार ने बताया कि कुछ लोग मेरे खिलाफ साजिश कर रहे हैं, ताकि मेरी छवि को धूमिल किया जा सके। शंका है तो जांच कर सकता है।
