नवगछिया की जगतपुर झील के साैंदर्यीकरण करने की तैयारी शुरू हाे गई है। वहां अब हरियाली के बीच बैठकर देशी-विदेशी पक्षियाें के कलरव काे निहार सकेंगे। मनरेगा के तहत 4.5 एकड़ में फैली जगतपुर झील से जलकुंभी साफ की जा रही है। लगातार 250-300 मनरेगा मजदूर इस काम में जुटे हैं। जब जलकुंभी की सफाई हाे जाएगी ताे मनरेगा से ही एक-एक एकड़ के चार तालाब बनेंगे। वहां सीढ़ियां बनेंगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!किनारे पर पेवर्स ब्लाॅक लगेंगे। तालाब के किनारे पाैधे भी लगाए जाएंगे। सभी तालाबाें का साैंदर्यीकरण हाेगा। तालाब में वन विभाग वाेटिंग की भी व्यवस्था करेगा। बरसात के पहले ज्यादा से ज्यादा काम हाे, इसका प्रयास चल रहा है। बीते सप्ताह में डीएम सुब्रत कुमार सेन ने वहां का निरीक्षण किया था।
उन्हाेंने कहा था कि पर्यटक स्थल के रूप में जगतपुर झील काे डेवलप किया जाएगा। वहां घूमने आनेवालाें के लिए कैफेटाेरिया भी बनेगा। डीएम के निरीक्षण के बाद इस दिशा में पहल तेज कर दी गई है। नए साल से लाेग वहां प्रकृति का आनंद उठा सकेंगे।

ठंड में प्रवासी पक्षियाें से गुलजार रहती है झील
जगतपुर झील का खास महत्व है। यह देशी-विदेशी पक्षियाें से गुलजार रहती है। खासकर ठंडे के माैसम में यहां पक्षियाें का कलरव देखते ही बनता है। भाेजन की तलाश में और जल क्रीड़ा करते हुए पक्षियां यहां नजर आते हैं। कुछ माह पहले पक्षी प्रेमियाें की एक टीम ने इस इलाके का सर्वे किया था। इसमें पाया गया था कि वहां पक्षियों की विविधता में काफी बढ़ाेतरी हुई है। कुछ पक्षी इस झील में लंबे अरसे बाद दिखे हैं।
खासकर शिल्ही, इनकी संख्या यहां करीब 200-250 है। इसके साथ ही रूस, अलास्का, मंगोलिया, तिब्बत, सेंट्रल एशिया के देशाें से भी यहां प्रवासी पक्षी आते हैं। प्रवासी पक्षियों में पिनटेल डक, कामन कूट, लालसर, ह्वाइट आइ पोचार्ड, वीजन डक, गडवाल डक, नारदर्न सोभलर, कामन टील, कामन पोचार्ड समेत बत्तख की प्रजातियां झील में नजर आते हैं।
कहलगांव का बटेश्वर स्थान भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हाेगा
कहलगांव का बटेश्वर स्थान भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हाेगा। जिला प्रशासन वहां व्यू प्वाइंट, लाइटिंग, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग से लेकर अन्य व्यवस्था करेगा। प्रस्ताव पर पर्यटन विभाग की सहमति मिल गई है। अब जमीन के लिए एनआोसी मांगा गया है। डीएम ने कहलगांव एसडीओ से एनओसी देने काे कहा है। संभावना जताई जा रही है कि सप्ताहभर के अंदर एनओसी पर्यटन विभाग काे भेज दिया जाएगा।
दोनों जगह जाने को इन रास्ताें काे दुरुस्त करने की जरूरत
जानकार बताते हैं कि जगतपुर झील और बटेश्वर स्थान काे डेवलप करने से पर्यटकाें की संख्या बढ़ेगी। इससे जिले का आर्थिक विकास हाेगा। लेकिन इसके लिए यह भी जरूरी है कि इन दाेनाें जगहाें पर जानेवाले रास्ताें काे भी दुरुस्त किया जाए। अभी विक्रमशिला सेतु के पहुंच पथ से जगतपुर झील जाने का रास्ता है। लेकिन वह कच्चा है। वहां पक्की सड़क बनाने की जरूरत है। कहलगांव के बटेश्वर स्थान जानेवाली सड़क बेहद खराब है, उसकी भी मरम्मत करनी हाेगी। जिला प्रशासन सड़काें काे भी दुरुस्त करने की याेजना बना रहा है।
पर्यटन की दृष्टि से हाे रहा डेवलपमेंट
नवगछिया के जगतपुर झील के साैंदर्यीकरण का काम मनरेगा के तहत शुरू किया गया है। आगे पर्यटन की दृष्टि से इसे और ज्यादा विकसित करने के लिए प्रस्ताव बनाकर पर्यटन विभाग काे भी भेजा जाएगा।
सुब्रत कुमार सेन, डीएम
