ढोलबज्जा । विलुप्त प्राय पक्षी गरुड़ के प्रजनन क्षेत्र में विश्व के तीसरे स्थान व एवं भारत में दुसरे स्थान पर कदवा में गरुड़ों पर संकट मंडराने लगा है। इस पक्षी के संरक्षण के लिए बिहार सरकार की योजना धरातल पर नजर नहीं आ रही है। लेकिन संबंधित लोग कदवा पहुंचकर देर शाम सात बजे सर्वे करते हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस बात की जानकारी देते हुए गरुड़ सेवियर ने बताया कि पेड़ पर सिर्फ तीन गरुड़ मरे थे। तीनों के पोस्टमार्टम में पेट में हवाई चप्पल का फीता तो तीसरे में सिर्फ चारा के रूप में गोबर मिला था।
वहीं ग्रामीणों की मानें तो पक्षी विशेषज्ञ अरविंद मिश्रा के उदासीनता रवैया से कदवा में जहां 2018-2019 में गरुड़ों के घोंसले की संख्या 150 थे तो वहीं 2024 में अभी 114 है। जब इस बात की जानकारी लेने के लिए अरविंद मिश्रा से बात करने का प्रयास किया तो उन्होनें फोन नहीं उठाया। वो करीब एक साल से मीडिया से मुखातिब होने से डरते हुए नवगछिया के खास लोगों से खबर चलवा रहे हैं।














