भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता होता हैं उपनयन संस्कार :-स्वामी आगमानंद ( खगड़िया, भागलपुर, कटिहार के दो दर्जन बटूक का हूआ उपनयन संस्कार ) ( नवगछिया ) उपनयन’ का अर्थ है, ‘पास या सन्निकट ले जाना।’ किसके पास? ब्रह्म (ईश्वर) और ज्ञान के पास ले जाना। जनेऊ धारण करने के बाद ही द्विज बालक को यज्ञ तथा स्वाध्याय करने का अधिकार प्राप्त होता है। द्विज का अर्थ होता है दूसरा जन्म। मनुष्य जीवन के लिए यह उपनयन संस्कार विशेष महत्त्वपूर्ण है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस संस्कार के अनन्तर ही बालक के जीवन में भौतिक तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।इस संस्कार में वेदारम्भ-संस्कार का भी समावेश है। इसी को यज्ञोपवीत-संस्कार भी कहते हैं इस संस्कार में आचार्य शिष्य से कहता है कि -‘तू ईश्वर का ब्रह्मचारी है। वस्तुतः ईश्वर ही तेरा आचार्य है। मैं तो उसकी ओर से तेरा आचार्य हूँ।’ इस का यह अर्थ है कि आचार्य कहता है कि ईश्वर कृपा से जो ज्ञान मैंने प्राप्त किया है, वही मैं तुझे दूंगा।

उक्त बातें श्री शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया आश्रम में आयोजित सामूहिक उपनयन संस्कार में परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने पत्रकारो के बीच कहीं। स्वामी जी के सानिध्य में श्री शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया आश्रम में ब्रह्मा पुरोहितों द्वारा खगड़िया, नवगछिया, कटिहार, भागलपुर जिले के दो दर्जन बरूवा का शुभ उपनयन संस्कार मुंडन व जेनऊ धारण पंडित अनरूद्ध शास्त्री, केशव शांडिल्य, उदय ठाकुर आदि के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न कराया गया ।

सभी बटूक ने स्वामी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया । महिलाओ के द्वारा जेनऊ के पारंम्परिक गीत सुनकर लोग झूमने लगे । इस तरह के कार्यक्रम को लेकर इलाके के सभी वर्गो के लोगो के बीच चर्चा का बिषय बना हूआ है। वही बटूक के परिजन गौरवान्वित महसूस कर रहे है कि परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के सानिध्य मेरे पुत्र का उपनयन संस्कार के साथ साथ आशीर्वाद प्राप्त हूआ । जो कि सौभाग्य की बात है। इस मौके पर भागलपुर, नवगछिया, खगड़िया, बांका, कटिहार, आदि जिले से जुडे स्वामी जी के अनुयायी उपस्थित थे ।

