दरभंगा। जिले के संस्कृत विवि के शिक्षा शास्त्र विभाग पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इस साल विभाग में नामांकन के आसार लगभग समाप्त हो चुके हैं। ऐसे में तय है कि इस साल विवि को 95 लाख का नुकसान होगा। इसके साथ ही शिक्षा शास्त्र विभाग में कार्यरत 16 शिक्षकों और 6 कर्मियों के वेतन पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअलस, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन के ईस्टर्न रीजनल कमेटी भुवनेश्वर ने इस विवि की मान्यता पर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, इसके दिल्ली मुख्यालय से मान्यता पुर्नबहाली का आदेश जारी कर दिया गया है। लेकिन, इसके 4 माह बाद भी ईस्टर्न रीजनल से मान्यता संबंधी पत्र जारी नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि यह विभाग स्वयं संचालित है। ऐसे में छात्रों के नामांकन से प्राप्त शुल्क से ही शिक्षक और कर्मियों का भुगतान किया जाता है। ऐसे में जब नामांकन ही नहीं होगा तो इन शिक्षाकर्मियों को भुगतान कैसे होगा? यह बड़ा सवाल है। वहीं, इस विभाग में 100 सीटें है।

संपन्न हो चुकी है प्रवेश परीक्षा
बता दें कि इस साल से बीएड में नामांकन की प्रक्रिया बदल चुकी है। सूबे के सभी विवि में बीएड का नामांकन राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होना है। इसके लिए संस्कृत विवि को लेकर अलग मापदंड रखे गए है, लेकिन प्रवेश परीक्षा 15 जुलाई को संपन्न हो चुकी है। इससे अब संस्कृत विवि में नामांकन के आसार पूरी तरह खत्म हो गई है।
नियमों का हवाला दे रद्द हुई थी मान्यता
हालांकि, विवि प्रशासन अभी भी उम्मीद लगाए है कि कोई ना कोई रास्ता जरूर निकलेगा। दरअसल, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन के इस्टर्न रीजनल कमेटी ने विभाग के संचालन में नियमों का पालन नहीं होने का हवाला देते हुए 23 अक्टूबर 2017 को नए सत्र में नामांकन पर रोक लगा दी थी। कमेटी के इस निर्णय के विरुद्ध विभाग ने एनसीटीई के दिल्ली मुख्यालय में अपील की थी। इसकी सुनवाई के बाद नामांकन पर रोक के आदेश को निरस्त कर दिया गया।
बैंठक में विभाग की मान्यता पुनर्बहाली नहीं हुई
विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम मिश्रा ने बताया कि 28 मई को ईस्टर्न रीजनल कमेटी के समक्ष दस्तावेजों की हार्ड कॉपी उपलब्ध कराई थी। इसके बाद विभाग से सभी फैकल्टी की लिस्ट 21 दिनों के अंदर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। जिसे 15 दिनों में ही विभाग ने उपलब्ध करा दिया। इसके बाद विभाग की निगाहें एनसीटीई की 2-3 जुलाई को होने वाली बैठक पर टिकी थी। हालांकि, बैठक तो हुई लेकिन उस बैठक में संस्कृत विवि के शिक्षा शास्त्र विभाग की मान्यता पुनर्बहाली पर चर्चा नहीं हो सकी।
अभी भी बची हैं उम्मीदें
वही, कुलपति प्रो. सर्व नारायण झा ने कहा कि अभी भी उम्मीदें बची हुई हैं। एनसीटीई से लगातार संपर्क किया जा रहा है। वहां से सकारात्मक संदेश मिले हैं। उम्मीद है कि हमें मान्यता संबंधी पत्र जल्द उपलब्ध हो जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट जारी नहीं हुआ है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों से विकल्प मांगे जाएंगे। तब तक हमें पत्र मिलने की उम्मीद है।
