पटना : महावीर मंदिर के सचिव एवं न्यास समिति के आचार्य किशोर कुणाल बताया कि साल 1983 में मंदिर ने आध्यात्मिक जागरण के साथ ही सामाजिक विकास के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई। मंदिर के कार्य को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए मार्च 1990 में एक नए न्यास का गठन हुआ।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हनुमान चालीसा में वर्णित चौपाई है ‘नाशै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा’। पटना जंक्शन के निकट स्थित हनुमान मंदिर इसको चरितार्थ करता दिखता है। यहां हनुमान वास्तव में संकट मोचक हैं तभी तो कैंसर से पीडि़त लोगों का कल्याण भी करते हैं। यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि लाखोंं लोगों के उपकार का माध्यम भी है। मंदिर में चढऩे वाला नैवेद्यम् प्रसाद एवं दान पेटी से प्राप्त राशि से कैंसर पीडि़तों का इलाज होने के साथ ही कई सामाजिक कार्य भी हो रहे हैं।

आइये इस मंदिर के इतिहास से परिचित होते हैं। करीब सौ साल पहले हनुमान की प्रतिमा कुछ भक्तों ने स्थापित की थी। तब शायद ही किसी ने यह कल्पना की होगी कि आने वाले समय में यह हजारों लोगों का भरण-पोषण कर कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों के इलाज में भूमिका निभाएगी।
सामाजिक विकास के केंद्र के रूप में बनाई पहचान
