नवगछिया : जी हां.. ये सच है नवगछिया बाजार के बीचों बीच वार्ड 18 स्थित माँ शीतला का जहाँ साक्षात सातों बहन के साथ शिला रूप में आज भी विराजमान है उस मंदिर में न दिन आरती होती है ना शाम, जबकि मंदिर का इतिहास 200 सौ साल पुराना है । मंदिर परिसर में एक पीपल का वृक्ष है जिसमे हर शनिवार को शुभ 4 बजे ही भक्तो का तांता लगा रहता है और शाम होते ही दीपों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है । कहते है ये वही वृक्ष है जो नवगछिया के इतिहास से जुड़ा हुआ है नवगछिया का नाम नौ वृक्षों के नाम से पड़ा था उनमे से ये वही वृक्ष मुख्य बाजार के बीचों बीच विशालकाय यह वृक्ष है ।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बूढ़े बुजुर्ग बताते है इस वृक्ष पर साक्षात भगवान शनिदेव विराजमान है । बुजुर्ग ने बताया कि उनकी दादी कहा करती थी कि उन्होंने संध्या बेला में माँ लक्ष्मी की कन्या रूप में इस वृक्ष से उतर मंदिर में प्रवेश करते देखा है लेकिन वो जब तक मंदिर में पहुची कन्या विलुप्त हो चुकी थी। आज नवगछिया बाजार में न जाने कई ऐसे मंदिर है जहाँ बाजार से चंदा कर मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया मगर इस मंदिर की हालत किसी खंडहर से कम नही बात दे कि मंदिर के आगे राहगीर ओर स्थानीय लोग गंदगी विसर्जित करते है ।

कड़वा सच है मंदिर का …
कही ये मंदिर किसी अन्य कारणों का शिकार तो नही आखिर क्यों नही हो रहा है मंदिर में रोज पूजा पाठ जबकि इस मंदिर में विराजमान माँ शीतला माड़वारी समाज की कुल देवी है हर सिहारा पर्व में मंदिर में तांता लगा रहता है उसके बाद दूसरे रोज मंदिर का दृश्य कुछ यूं होता है पूरा अन्य में मख्खी भिनभिनाते रहते है कई दिनों तक अनाज सड़ता है जब कोई भक्त शनिवार को मंदिर में पूजा करने आता है तो उसकी थोड़ा साफ सफाई कर देता है बाकी दिन शाम में एक दिया जलाने वाला कोई नही है।
