नदियां तटीय इलाकों में रौद्र रूप धारण कर लिया है. नदियों के कटाव और जर्जर तटबंधों पर उपनाई नदियों के बढ़ते दबाव और तेवर देखकर नदी तटीय ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है. संभावित बाढ़ की आशंका से नदी तट के किनारे बसे गांव के लोग पलायन करने लगे हैं. संभावित बाढ़ की आशंका से लोग परेशान है.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!लोगों को यह समझ में नहीं आता आखिर इस विपरीत परिस्थिति में क्या करें? वही जल संसाधन विभाग द्वारा किया जा रहा बचाव कार्य काफी नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस मंथर गति से कभी कदा कार्य कर दिया जाता है.

उससे संभावित बाढ़ के खतरे को कम नहीं किया जा सकता. जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर इस बार राघोपुर के समीप हाई लेवल ब्रह्मा बाबा स्थान ब्रह्म बाबा स्थान के समीप खतरा बना हुआ है तकरीबन सौ मीटर के दायरे में भीषण कटाव जारी है. पूरब से पश्चिम तक तकरीबन 500 मीटर का क्षेत्र भीषण कटाव से प्रभावित है. रुक-रुककर कटाव हो ही रहा है. गुरुवार को हुए कटाव को नियंत्रित करने के लिए जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने प्रभाविता स्थल का दौरा किया और प्रभावित स्थल को एनसी बैग और बालू भरी बोरियों से तत्काल पैक कर दिया गया है. लेकिन गंगा नदी का दबाव ब्रह्म बाबा स्थान के समीप बढ़ता ही जा रहा है .
सैकड़ो एकड़ में लगी केले की फसल बर्बाद हो जाएगी. केला उत्पादक किसानों को भीषण क्षति होगी. वहीं कोसी नदी के रौद्र रूप धारण करने से उसी तटीय गांव सिहकुण्ड, मैरचा लोकमानपुर और चोरहर में भी कटाव जारी है. सिहकुण्ड में जल संसाधन विभाग द्वारा नदियों के कटाव को रोकने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन लोकल अपराधियों के उपद्रव से सिहकुण्ड मैं फ्लड फाइटिंग काम कराना अब जल संसाधन विभाग के लिए मुश्किल हो गई है. जर्जर और कमजोर तटबंधों को अविलंब मरम्मत नहीं किया गया क्षेत्र के लोगों को बाढ़ के समय में भीषण कीमत चुकानी होगी जिससे जान माल की भीषण क्षति होगी.
