बिहार : राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले मेडिकल छात्रों के लिए तीन साल तक बिहार में सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया है।
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इतना ही नहीं पीजी में नामांकन के बाद उन्हें अपनी पढ़ाई भी पूरी करनी होगी। बीच में यदि उन्होंने दूसरे कोर्स में एडमिशन लिया तो उन्हें आर्थिक दंड भुगतान होगा।
सरकार ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों से पीजी करने वाले छात्रों द्वारा कोर्स को बीच में छोड़ अन्य कोर्स में दाखिला लेने की प्रवृत्ति को देखते हुए छात्रों से बांड पेपर लेने का फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग के इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।

दूसरे कोर्स में एडमिशन ले लेते हैं छात्र
कैबिनेट की बैठक के बाद प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि बीच में पढ़ाई छोड़कर दूसरे कोर्स में एडमिशन लेने के चलते राज्य को पर्याप्त संख्या में पीजी चिकित्सक नहीं मिल पाते वहीं पीजी कोर्स की सीटें भी खाली रह जाती हैं। आकलन के मुताबिक पीजी में कम से कम साठ से सत्तर फीसद सीटें खाली रह जाती हैं।
