लाइफलाइन कहा जाने वाला विक्रमशिला पुल गाड़ियों की भार से हांफ रहा, रोज करीब पांच हजार गाड़ियां गुजरती

भागलपुर / पटना

कोसी और भागलपुर का लाइफलाइन कहा जाने वाला विक्रमशिला पुल गाड़ियों की भार से हांफ रहा है। कोई दिन ऐसा नहीं जब पुल पर जाम नहीं लगता हो। जाम ऐसा-तैसा नहीं, 10-10 घंटे गाड़ियां फंसी रहती हैं। पुल पर लगने वाले जाम ने पूर्व बिहार व कोसी-सीमांचल के बीच की दूरी को तय करने में लगने वाले समय को और बढ़ा दिया है।पूर्व सूचना जनसंपर्क उपिनदेशक और स्थानीय मामलों के जानकार डॉ. शिवशंकर सिंह परिजात के अनुसार भागलपुर में गंगा पर पुल बनाने के लिए 1970 में सर्वे शुरू हुआ। सर्वे और सरकार से स्वीकृति बनने के बाद 1990 में पुल बनने का काम शुरू हुआ। 2001 में पुल का उद्घाटन हुआ। पुल बनने के बाद भागलपुर कोसी और सीमांचल से जुड़ा।

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जिस समय गंगा पर विक्रमशिला पुल बना वह पानी में भारत का तीसरा सबसे लंबा पुल था। इसकी लंबाई 4.7 किलोमीटर और चौड़ाई साढ़े सात मीटर है। जिस समय पुल का सर्वे और निर्माण कार्य शुरू हुआ उस समय आबादी और गाड़ियों की संख्या काफी कम थी।पांच हजार गाड़ियों का लोडविक्रमशिला पुल बिहार के व्यस्ततम पुलों में एक है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि विक्रमशिला पुल होकर रोज करीब पांच हजार गाड़ियां गुजरती हैं। इसमें एक हजार से अधिक बड़ी गाड़ियां शामिल हैं।

 

टू लेन होने और गाड़ियों की अधिक संख्या के चलते पुल पर अक्सर जाम लगा रहता है। भागलपुर और झारखंड की तरफ से कोसी, सीमांचल और पटना की तरफ जाने के लिए एकमात्र विक्रमशिला पुल ही विकल्प है। चम्पानाला पुल पर भारी वाहनों के रोक के चलते भी विक्रमशिला पुल पर लोड बढ़ गया है। झारखंड, पूर्व बिहार व सीमांचल व कोसी के जिलों की गाड़ियां विक्रमशिला पुल होकर गुजरती है। पत्थर और बालू लदे सैकड़ों ट्रक पुल होकर गुजरते हैं।पुल पर जाम बना जानलेवा विक्रमशिला पुल का जाम भागलपुर शहर से लेकर सबौर-घोघा तक लगा रहता है। पुल पर गाड़ी खराब होने या ओवरटेकिंग के चलते अक्सर जाम लगता है।

इस जाम में फंसकर कई बार रोगियों की मौत भी हो गई है। पुल पर गाड़ियां अट नहीं पा रही हैं। इसके चलते तिलकामांझी से लेकर सबौर के बीच गाड़ियों का रेला लगा रहता है। पुल कमजोर, सामांतर पुल बना दूर की कौड़ीविक्रमशिला पुल कमजोर हो चुका है। जांच में ज्वाइंट सहित अन्य पार्ट्स कमजोर पाये जाने के बाद मुम्बई की कंपनी को मरम्मत करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। मरम्मत का काम अभी चल रहा है। पुल पर जाम लगने और कमजोर होने के चलते मुख्यमंत्री ने विक्रमशिला पुल के सामानांतर नया फोरलेन पुल बनाने की घोषणा की है।

नया पुल के लिए सर्वे का काम चल रहा है, लेकिन अभी कई प्रक्रियाओं को पूरा करना है। दो साल में इसका डीपीआर भी नहीं बन पाया है। कोटजाम से निपटने के लिए कार्ययोजना बनायी गयी है। इसी के तहत ओवरलोड़िंग के विरुद्ध कार्रवाई करने का अभियान चलाया जा रहा है। गाड़ियों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। सामानांतर पुल भी बनाने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि सामानांतर पुल बनने में समय लगेगा।