भागलपुर। फर्जी जाब कार्ड मामले में पीरपैंती प्रखंड के ओलापुर पंचायत के पंचायत रोजगार सेवक को बर्खास्त (अनुबंध रद) कर दिया गया है। ओलापुर पंचायत के तत्कालीन पंचायत रोजगार सेवक संजीव कुमार सिंह पर यह कार्रवाई उपविकास आयुक्त ने की है। साथ ही पंचायत रोजगार सेवक राजेश कुमार से स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ करने का निर्देश दिया गया है। पीरपैंती प्रखंड के ओलापुर पंचायत में मनरेगा योजना में भारी गड़बड़ी हुई है। काफी संख्या में लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से दो-दो जाब कार्ड बनाया गया है। दोनों ही जाब कार्ड पर एक ही दिन में दो अलग-अलग जगहों पर काम दिया गया है। दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद मामले की जांच कराई गई तो खबर सच साबित हुई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उप विकास आयुक्त द्वारा जो आदेश पारित किया गया है, उसमें कहा गया है कि पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ओलापुर में एक ही मजदूर का दो जाब कार्ड बनाया गया है। एक ही दिन में दो अलग-अलग कार्यों में उपस्थिति बनाकर राशि की निकासी की शिकायत की गई है। जांच प्रतिवेदन के आलोक में सभी संबंधित से स्पष्टीकरण पूछा गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी पीरपैंती ने अपने जांच रिपोर्ट में कहा है कि ग्राम पंचायत ओलापुर में रानी देवी, पति नितेश कुमार राय एक ही महिला है, का जाब कार्ड अलग-अलग आइडी संख्या से निर्गत है। रानी देवी के द्वारा समान तिथि में कल 14 कार्य दिवस का अलग-अलग जाब कार्ड से मास्टर रोल में उपस्थिति दर्ज कराते हुए अनियमित मजदूरी का भुगतान किया गया है।

निक्की देवी, पति अजित कुमार ठाकुर एक ही महिला है, का दो जाब कार्ड अलग-अलग काइडी संख्या से निर्गत है। निक्की देवी के द्वारा मास्टर रोल संख्या 8673 व 8372 में अलग-अलग जाब कार्ड संख्या से समान कार्य दिवस में कुल पांच दिनों का उपस्थिति दर्ज कराते हुए मजदूरी का भुगतान किया गया है। साथ ही मास्टर रोल संख्या 23316 में भी इनके द्वारा दो अलग-अलग जाब कार्ड से कुल 12 दिनों की उपस्थिति समान कार्य दिवस में दर्ज कराते हुए अनियमित मजदूरी का भुगतान किया गया है।
जांच प्रतिवेदन में यह भी प्रतिवेदित किया गया है कि नियमानुसार दंड सहित राशि की वसूली कर एसइजीएफ खाता में जमा कर दी गई है एवं उक्त लाभुकों का डुप्लीकेट जाब कार्ड रद कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान पंचायत रोजगार सेवक संजीव कुमार सिंह से जांच प्रतिवेदन के आलोक में पृच्छा की गई। उनके द्वारा स्वीकार किया गया कि सभी लाभुकों का मानवीय भूलवश दोनों जाब कार्ड में उपस्थिति दर्ज रहने के कारण मजदूरों को भुगतान किया गया है। पंचायत रोजगार सेवक से जाब कार्ड सत्यापन की अद्यतन स्थिति के संबंध में पृच्छा की गई। न्यून उपलब्धि के लिए पृच्छा करने पर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया, जिससे स्पष्ट हो गया कि पंचायत रोजगार सेवक द्वारा जाब कार्ड सत्यापन के कार्य में रूचि नहीं ली जाती है।
प्राप्त शिकायत और जांच प्रतिवेदन के आधार पर उप विकास आयुक्त ने अपने निर्णय में कहा है कि मनरेगा योजना में चारों लाभुकों का दो-दो जाब कार्ड का निर्माण कर एवं लाभुक एक ही दिन में दो स्थलों पर उपस्थित रहने व राशि का भुगतान किया गया है। इसके लिए तत्कालीन पंचायत रोजगार सेवक संजीव कुमार सिंह पर गंभीर आरोप प्रमाणित होता है। कार्यक्रम पदाधिकारी गोराडीह द्वारा लिखित रूप से प्रतिवेदित किया गया है कि दोबारा जाब कार्ड का निर्माण पंचायत रोजगार सेवक राजेश कुमार द्वारा निर्माण कार्य किया गया है। उक्त आलोक में लाभुकों के दो जाब कार्ड निर्माण के विन्दु पर स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ करने का निर्देश दिया जाता है। दिए गए निर्देश के बावजूद भी जाब कार्ड सत्यापन न करना एवं असंतोषजनक कार्यशैली का प्रदर्शन करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। यह कृत्य सरकार की जनकल्याणकारी योजना के क्रियान्वयन में घोर लापरवाही एवं विभागीय निर्देशों की प्रत्यक्ष अवहेलना को प्रमाणित करता है। इस आधार पर ऐसे कर्मी को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप दंडित किया जाना आवश्यक है। तत्कालीन पंचायत रोजगार सेवक संजीव कुमार सिंह के विरुद्ध अनुबंध रद करने का आदेश पारित किया जाता है।

