खरीक : कोसी नदी के किनारे बसी खरीक की भवनपुरा पंचायत के रतनपुरा, मैरचा समेत सिंहकुंड आदि गांवों में कटाव की रफ्तार तेज हो गई है। सोमवार को रतनपुरा और मैरचा में कार्तिक सिंह समेत बीस किसानों की 40 एकड़ जमीन और लीची, शीशम, कटहल के बागान कोसी में विलीन हो गए। इससे किसानों में त्रहिमाम मच गया है। लोग दहशत में आ गए हैं। भवनपुरा पंचायत में चालीस साल पुराना विशाल पीपल का पेड़ कटाव की जद में आ गया है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस पेड़ से लोगों की आस्था जुड़ी है। ग्रामीण द्वारा पेड़ की पूजा-अर्चना की जाती है। ग्रामीणों ने कहा कि जल संसाधन विभाग की लापरवाही के कारण किसानों की पुश्तैनी जमीन, बागान और घर नदी में कटकर समा रहे हैं। अगर, कटाव निरोधी कार्य तेज नहीं किया गया तो अब कई गांवों का अस्तित्व मिट जाएगा। अब तक दर्जनों किसानों की जमीन और घर कोसी में विलीन हो चुके हैं। सिंहकुंड में अबतक 20 घर कट गए हैं। तीस घर कटाव के मुहाने पर आ गए हैं। दर्जनों लोग बेघर हो गए।

इनकी जिंदगी खुले आसमान के नीचे गुजर रही है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी किसी की सुध नहीं ले रहे। कटाव के भय से मुकेश सिंह, मुरलीधर सिंह, सुनील सिंह, अशोक कुमार, अनिल सिंह, गोपाल सिंह, जवाहर सिंह, ज्योति सिंह, शंभु सिंह, शंभु राय, दिनेश राय आदि ग्रामीण अपने-अपने घरों से सामान निकाल कर सुरक्षित स्थान पर निकल गए हैं।
