नवगछिया : मोहन पोद्दार, अगले माह शुक्ल पक्ष नवमी, 14 जनवरी को भगवान सूर्य का राशि परिवर्तन होगा। सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। सूर्य के मकर राशि में पहुंचने पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान पुण्य का विशेष महत्व है। इसके साथ ही माघ स्नान की शुरुआत हो जाएगी। इसके साथ ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे और खरमास समाप्त हो जाएगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ज्योतिषाचार्य दयानंद पाण्डेय के मुताबिक नए साल में सोमवार यानी 14 जनवरी की मध्यरात्रि में सूर्य का मकर राशि में संक्रमण होगा। 15 जनवरी की सुबह से ही संक्रांति की पूजा-अर्चना व स्नान दान शुरू हो जाएगा। मकर संक्रांति के दिन सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर परिवर्तन माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन से ही दिन बढ़ने लगता है और रात्रि की अवधि कम होती चली जाती है। सूर्य ऊर्जा का स्रोत है इसे अधिक देर चमकने से प्राणी जगत में चेतना और उसकी कार्य शक्ति में वृद्धि होती है।

इसलिए हमारी संस्कृति में मकर संक्रांति पर्व मनाने का विशेष महत्व है। बिहार और उत्तर प्रदेश में खिचड़ी पर्व के रूप में इसे मनाया जाता है। माना गया है कि सूर्यास्त से पहले सूर्य का संक्रमण हो तो उसी तिथि वार दिन के हिसाब से मकर संक्रांति मनाना शुभ है। संक्रांति पर श्रद्धालुओं द्वारा स्नान, दान, तिल, गर्म कपड़े आदि का दान करना अति शुभ है। इसके पूर्व में भी मलमास के कारण मकर संक्रांति आगे पीछे की तिथियों में मनाई गई है। मकर के स्वामी शनि और सूर्य के विरोधी राहू होने के कारण दोनों के विपरीत फल के निवारण के लिए तिल का प्रयोग किया जाता है।
इस दिन तिल, गुड़ और गर्म कपड़े दान करना अति शुभ
विष्णु को प्रिय है तिल
उत्तरायण में सूर्य की रोशनी में और प्रखरता आ जाती है। तिल से शारीरिक मानसिक और धार्मिक उपलब्धियां प्राप्त होती हैं। तिल भगवान विष्णु को प्रिय है और यह गर्म भी होता है। मान्यता है कि तिल के दान और खिचड़ी खाने से विष्णुपद की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य प्रो. डॉ. सदानंद झा ने बताया कि सूर्य मकर से मिथुन राशि तक उत्तरायण और कर्क से धनु राशि तक दक्षिणायन में रहते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को रात कहा जाता है। इस बार संक्रांति 15 जनवरी को होगी।
