सर्वार्थ सिद्धि योग में 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाएगी। मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा पहले वास्तुकार और इंजीनियर हैं। इन्होंने ही स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान, द्वारिका नगरी, यमपुरी, कुबेरपुरी आदि का निर्माण किया था। इस दिन विशेष तौर पर औजार, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों, कारखानों आदि की पूजा की जाती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नया बाजार स्थित पंडित श्रीराम पाठक ने बताया कि इस बार 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी। विश्वकर्मा पूजा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 6:07 मिनट से अगले दिन 18 सितंबर को प्रात: 3: 36 मिनट तक बना रहेगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्यापार में तरक्की और उन्नति होती है। जो भी कार्य किया जाता है वो पूरा होता है। भगवान विश्वकर्मा को संसार का पहला इंजीनियर भी कहा जाता है।

अधिकांश जगहों पर स्थापित होंगी छोटी प्रतिमाएं
सुरक्षा दृष्टिकोण से इस बार अधिकांश जगहों पर भगवान विश्वकर्मा की छोटी प्रतिमाएं ही स्थापित होंगी। बरारी औद्योगिक प्रागंण, रेलवे व छोटे-छोटे कल-कारखाने में शांतिपूर्ण ढंग से पूजा-अर्चना की जाएगी। जीरोमाइल में आटा चक्की के संचालक राजेश कुमार ने बताया कि उनके यहां चार फीट की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यहां पूजा शांतिपूर्ण ढंग से की जायेगी। प्रसाद के लिए भी कम लोगों को बुलाया गया है।
चार से छह फीट तक की बनी प्रतिमा
उधर, अम्बे के मूर्तिकार रंजीत पंडित ने बताया कि कोरोना काल से पहले आठ फीट तक की प्रतिमा बनती है। इस बार लोगों ने चार से छह फीट तक की प्रतिमा ही बनायी है। कई जगहों पर इस बार प्रतिमा नहीं बैठाई गयी है। रेलवे के कई जगहों पर प्रतिमा स्थापित होती है। इस बार रेलवे के कुछ ही विभागों की प्रतिमा बनायी गयी है। उन्होंने बताया कि बिजली कार्यालय, रेलवे, साह मार्केट, सोनापट्टी आदि जगहों की प्रतिमा उनके द्वारा बनाई गयी है।
