विक्रमशिला सेतु का हेल्थ ऑडिट तेज, कई स्पैन में मिली खामियां
आईआईटी पटना-मुंबई की टीम कर रही जांच, कमजोर स्लैब और बॉल-बियरिंग बदले जाएंगे
विक्रमशिला सेतु का स्लैब गंगा में समा जाने के बाद पुल की वास्तविक स्थिति जानने के लिए लगातार तकनीकी जांच जारी है। बीते दो दिनों से आईआईटी पटना और मुंबई की विशेषज्ञ टीम पूरे सेतु का हेल्थ ऑडिट कर रही है। आधुनिक मशीनों और लिफ्ट की मदद से पुल के ऊपरी और निचले हिस्सों की गहन जांच की जा रही है।
शनिवार को टेक्नीशियन टीम ने भागलपुर साइड के क्षतिग्रस्त हिस्सों की जांच की। इस दौरान कई स्पैन में तकनीकी खामियां सामने आईं। जिन हिस्सों में गड़बड़ी मिली, वहां टीम ने विशेष मार्किंग की ताकि आगे मरम्मत कार्य के दौरान उन्हें आसानी से चिन्हित किया जा सके।

पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार तकनीकी निगरानी में चरणबद्ध तरीके से कमजोर और क्षतिग्रस्त स्लैब को बदलने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत पुराने स्लैब को तोड़कर नए स्लैब लगाए जाएंगे। इसके अलावा सेतु के सभी स्पैन में लगे बॉल-बियरिंग भी बदले जाएंगे। जैक की मदद से स्पैन को ऊपर उठाकर मरम्मत और रिप्लेसमेंट का काम किया जाएगा, ताकि पुल की मजबूती लंबे समय तक सुनिश्चित की जा सके।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में भी विक्रमशिला सेतु के एक स्पैन में दरार आई थी। उस समय मुंबई की एजेंसी द्वारा कार्बन प्लेट चिपकाकर मरम्मत की गई थी। अब मुख्यालय स्तर के अधिकारी उस कार्बन प्लेट की स्थिति की भी जांच करा रहे हैं, क्योंकि केमिकल बाइडिंग युक्त कार्बन प्लेट की एक निश्चित आयु होती है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में कार्बन प्लेट कमजोर पाई जाती है, तो केवल नई प्लेट लगाने के बजाय पूरे स्पैन को बदलने पर विचार किया जाएगा। इस संबंध में कार्बन प्लेट लगाने वाली मुंबई की एजेंसी “रोहरा रिबिल्ड” से भी संपर्क प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2017 में मरम्मत के दौरान मुंबई की एजेंसी ने एक स्पैन में दरार की सूचना विभाग को दी थी, जिसके बाद कार्बन प्लेट लगाकर उस हिस्से को दुरुस्त किया गया था।

