नवगछिया : रंगरा प्रखंड क्षेत्र के मुरली चंद्रखड़ा में संतमत सत्संग का 37 वां दो दिवसीय अनुमंडलीय वार्षिक अधिवेशन शनिवार से प्रारंभ हो गया. अधिवेशन रविवार तक चलेगा. सत्संग का शुभारंभ संतमत सत्संग की स्तुति और विनती के साथ की गई. इसके बाद संतमत सत्संग की केंद्रीय आश्रम, कुप्पाघाट, भागलपुर से आए गुरूसेवी स्वामी भागीरथ वावा, स्वामी निर्मलानंद बाबा, स्वामी सत्यप्रकाश बाबा, स्वामी सहदेव वावा, स्वामी नरेंद्र नंद बाबा, स्वामी परमानंद, मनकेश्वर बाबा, सुरेशानंद बाबा आदि महात्माओं का स्वागत कमेटी के सदस्यों द्वारा माल्यार्पण किया गया.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दो दिवसीय सत्संग के पहले दिन संध्या सत्र के सत्संग के दौरान गुरु सेवी स्वामी भागीरथ बाबा ने कहा की इस कलयुग में सत्संग के द्वारा ही मानव जीवन का कल्याण हो सकता है. मानव शरीर में पाए जाने वाले दुर्गुण लोभ, हिंसा, व्यभिचार, नशा, ईष्या एवं काम, क्रोध के त्याग से ही हमारा तन मन पवित्र हो सकता है. इसके बाद फिर सत्संग के माध्यम से ही मोक्ष को प्राप्त कर सकते है. सत्संग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए स्वामी प्रमोद बाबा ने कहा कि यह मानव जीवन पूर्व जन्मों के काफी कठिन परिश्रम के बाद मिला है.

इसलिए सांसारिक मोह एवं लोभ को त्यागकर मोक्ष की प्राप्ति के लिए संतों की शरण में जाना चाहिए. संतों की शरण में जाने से ही मानव जीवन का उद्धार हो सकता है. इसके अलावा स्वामी निर्मलानंद बाबा, स्वामी सत्यप्रकाश, स्वामी सुरेशानंद, रविनंदन बाबा, घनश्याम बाबा, सुरेंद्र बाबा आदि संत महात्माओं के दिव्य वचनों को सुनकर हजारों की संख्या में पहुंचे सत्संग एवं धर्म प्रेमी श्रोताओं ने सत्संग सागर में डुबकी लगाकर सारोबार हो गए.

इस दौरान नवगछिया अनुमंडल के अलावा सीमावर्ती जिला, कटिहार, पूर्णिया एवं मधेपुरा जिले से भी हजारों सत्संग प्रेमियों की खासकर महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रोताओं की भीड़ से पूरा पंडाल खचाखच भर गया था. श्रोता दोपहर एवं संध्या दोनों सत्रों के दौरान पूरे ध्यानपूर्वक संत महात्माओं के प्रवचन रूपी गंगा में डुबकी लगाकर मंत्रमुग्ध हो रहे थे. इस मौके पर संतमत सत्संग आयोजन समिति के अध्यक्ष, विपिन मंडल, उपाध्यक्ष सुबोध साह, पंचायत के मुखिया, प्रदीप मंडल, भीम शर्मा, बबलू मंडल, देवनारायण मंडल, सेवानिवृत्त शिक्षक, रामशरण मंडल, जयप्रकाश साह, चमरू मंडल के अलावा मुरली एवं चंद्रखड़ा गांव के दर्जनों लोग सत्संग को सफल बनाने में लगे हुए थे.
