भागलपुर में शिक्षक छुट्टी की अनोखी एप्लीकेशन लिख रहे हैं। कोई कह रहा है कि 5 दिसंबर को मेरी मां मारने वाली है, इसलिए छुट्टी चाहिए। वहीं, कोई कह रहा है कि दो दिन बाद उसे भोज में जाना है, तो वहां खाने से पेट खराब होगा, इसलिए तीन दिन बाद छुट्टी चाहिए। छुट्टियों की ऐसे कई अजीब आवेदन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। दरअसल, भागलपुर, मुंगेर समेत अन्य जिलों में जिला शिक्षा अधिकारियों ने आकस्मिक अवकाश और उपस्थिति को लेकर नए फरमान जारी किए हैं। स्कूली शिक्षक इसके विरोध में उतर आए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विभागीय आदेश के मुताबिक शिक्षकों को आकस्मिक अवकाश लेने के लिए अब तीन दिन पहले आवेदन करना होगा। इस आदेश से गुस्साए शिक्षकों का कहना है कि आकस्मिक अवकाश आपातकालीन परिस्थिति में लिया जाता है। किसी भी कर्मचारी को तीन दिन पहले ही कैसे पता चल जाएगा कि उसे इमरजेंसी लीव चाहिए। इसके अलावा स्कूली शिक्षकों को सुबह 9 बजकर 5 मिनट तक सेल्फी क्लिक करके हाजिरी बनाने का आदेश भी जारी हुआ है। इसका भी राज्यभर में विरोध होने लगा है।
शिक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी
कहीं इसे शिक्षकों पर किसी खास उद्देश्य से अतिरिक्त दबाव बनाने का आरोप बताया जा रहा है तो कहीं इसके विरोध में ई-मेल अभियान छेड़ दिया गया है। बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद कौशल सिंह ने कहा कि बिहार के शिक्षक भविष्य वक्ता नहीं हैं जो तीन दिन पहले ही आने वाली परेशानियों के मद्देनजर आकस्मिक अवकाश के लिए आवेदन स्वीकृत करवा कर रख लेंगे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डिजिटल तकनीक से शिक्षकों के रियल टाइम उपस्थिति की जांच के लिए बेस्ट प्लस ऐप से अनुश्रवण करने का निर्देश दिया है। लेकिन विभागीय इसे दरकिनार कर शिक्षकों को मोबाइल से सेल्फी खींचकर उपस्थिति दर्ज करने का एक नया फरमान जारी कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि तुगलकी फरमान जारी कर शिक्षकों को प्रताड़ित करना बंद नहीं किया गया तो शिक्षक सड़क पर उतरेंगे।

आकस्मिक अवकाश के लिए 3 दिन पहले आवेदन, टीचर्स ने बताया तुगलकी फरमान
बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ की प्रदेश सचिव सुप्रिया सिंह ने कहा कि भागलपुर जिला विभाग शिक्षकों का शोषण करना बंद करे। आए दिन तरह-तरह के तुगलकी फरमान से शिक्षकों को मानसिक प्रताड़ना देना दुखद है। शिक्षिकाओं की सेल्फी ग्रुप में भेजना उनके निजता का हनन है। तीन दिन पहले अवकाश की सूचना देने को लेकर शिक्षकों ने कहा है कि तीन दिन पूर्व कोई कैसे बता सकता है कि क्या होने वाला है। यह भी आदेश दिया गया है कि स्कूल में पदस्थापित कुल शिक्षकों के केवल 10 फीसदी शिक्षक की अवकाश में रह सकते हैं। जबकि पूर्व से नियम है कि अधिकतम 50 फीसदी शिक्षक अवकाश में रह सकते हैं।
